धीरेंद्र शास्त्री के संकल्प जो समाज के लिए है कल्याणकारी(2023)

समय समय पर हमारे भारत वर्ष में सनातन प्रेमियों के लिए भागवत कथा ,राम कथा ,शिव महापुराण और सुन्दर कांड का आयोजन होता है। जिसमे धर्म प्रेमी जनता अपनी आत्मा के उद्धार के लिए इन आयोजनों में पधारते है। इन कथाओ को अलग अलग कथा वाचको द्वारा की जाती है। इन्ही कथा वाचको में एक नाम आता है धीरेंद्र शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार का।आखिर क्या है बागेश्वर धाम सरकार और क्यों धीरेंद्र शास्त्री के संकल्प इतने प्रसिद्ध है। इस पोस्ट में हम जानेंगे।

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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और बागेश्वर धाम

लगभग ३०० वर्ष पहले जिस मानव कल्याण और जनसेवा की परंपरा की शुरुवात सन्यासी बाबा जी ने की थी ,अब वही परंपरा को और आगे बढ़ा रहे हैं बालाजी महाराज के कृपा पात्र, श्री दादा गुरुजी महाराज के उत्तराधिकारी पूज्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी , जिन्हे पूरी दुनिया बागेश्वर धाम सरकार के नाम से संबोधत करती है।श्री दादा जी महाराज सन्यासी बाबा बागेश्वर धाम सरकार के गुरु है। उन्होंने यंहा श्री बालाजी की पूजा की थी।

बागेश्वर धाम सरकार यानि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर हनुमानजी की असीम कृपा है। बागेश्वर धाम में जो भी बालाजी महाराज की शरण में अपनी मनोकामना लेकर आता है, बालाजी महाराज अपने परम भक्त बागेश्वर धाम सरकार के माध्यम से उसे पूर्ण करवाते हैं।बालाजी महाराज के आशीर्वाद से महाराज श्री बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ख्याति की गवाही तो उनकी कथाओं और उनके दरबारों में चमत्कारों के द्वारा श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देती है। महाराज श्री के दर्शन और उनकी एक झलक पाने के लिए ना जाने कहां कहां से श्रद्धालुगण देशभर में हो रही इनकी कथाओं में पहुंचते हैं और उनकी दिव्यवाणी का श्रवण करते हैं।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म 4 जुलाई 1996 को मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के ग्राम गढ़ा में सरयूपारीय ब्रह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम श्री रामकृपाल जी महाराज और माता का नाम भक्तिमति माता सरोज है।सरयूपारीय ब्रह्मण परिवार में जन्मे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी का बचपन गरीबी और तंगहाली में बीता। ब्रह्मण परिवार प्रायः कर्म कांड करके और पूजा पाठ करके ही जीवन गुजरते है इसलिए इन्हे पूजा पाठ में जो दक्षिणा मिल जाती उसी से 5 लोगों का परिवार चलता था ।

ऐसे में पूज्य महाराज श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपनी शिक्षा भी अधुरी छोड़नी पड़ी। तीन भाई-बहन में सबसे बड़े धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पूरा बचपन अपने परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था करने में ही गुज़र गया।लेकिन एक दिन बालाजी महाराज (हनुमानजी )की आज्ञा और कृपा से उन्हें उनके दादा जी श्री श्री 1008 दादा गुरु जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ और दादा गुरु के आशिर्वाद और आदेश से महाराज श्री बालाजी महाराज की सेवा में जुट गए। सन्यासी बाबा और इस धाम(Bageshwar Dham) की महिमा को दुनिया भर में फैलाया।

धीरेंद्र शास्त्री के संकल्प

“जो अपने लिए ना जी कर दूसरों के लिए जीएं, अपना पूरा समय मानवता की सेवा और सनातन धर्म के उत्थान के लिए दें, ऐसे महापुरुष का हमारी इस पावन धरती पर होना गर्व की बात है।” धीरेन्द्र शास्त्री के संकल्पों ने मानव कल्याण की परिभाषा को एक नया आयाम दिया है। ना जाति, ना धर्म और ना समुदाय…बिना किसी भेदभाव के जो मानव सेवा को ही अपना धर्म समझे ।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पूज्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी(Bageshwar Dham Sarkar)के संकल्पों ने समाज कल्याण और लोक कल्याण की एक अलग परिभाषा गढ़ी है। महाराजश्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के संकल्पों का जीता जागता उदाहरण है धाम परिसर में चल रही अन्नपूर्णा रसोई, धाम की चढ़ोत्री(धन दान ) से प्रतिवर्ष गरीब और बेसहारा बेटियों का विवाह, वैदिक शिक्षा(संस्कृत) के लिए धाम परिसर में गुरुकुल, पर्यावरण संरक्षण के लिए देशभर में बागेश्वर बगिया, गौरक्षा के लिए नारा – “गौशाला नहीं उपाय, एक हिन्दू एक गाय” और बेसहारा बच्चों के लिए रहने खाने से लेकर शिक्षा की व्यवस्था करना….महाराज श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के इन नेक संकल्पों में अब देश-विदेश के श्रद्धालु जुड़ते जा रहे हैं।

अन्नपूर्णा रसोई

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अन्नपूर्णा रसोई

बागेश्वर धाम सरकार यानि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का संकल्प है कि बागेश्वर धाम पर आने वाला कोई भी शख्स भूखा ना रहे। इसलिए धाम में अन्नपूर्णा रसोई की शुरुआत की गई।अन्नपूर्णा रसोई को आप भंडारा भी समझ सकते है। अन्नपूर्णा रसोई के द्वारा हर रोज हजारों और मंगलवार-शनिवार को तो लाखों लोगों के लिए नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की जाती है। अन्नपूर्णा रसोई की सारी व्यवस्था धाम पर आने वाली चढोत्री यानि याने आने वाले अन्न दान का कुछ हिस्सा और धन दान के द्वारा की जाती है।

गरीब और बेसहारा कन्याओं का विवाह

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गरीब और बेसहारा कन्याओं का विवाह

धीरेंद्र शास्त्री के संकल्प में से प्रमुख है गरीब और बेसहारा कन्याओ का विवाह।बागेश्वर धाम सरकार का कहना है कि जिनका कोई नहीं उनके लिए बागेश्वर बालाजी महाराज हैं। आज बागेश्वर धाम के द्वारा प्रतिवर्ष कई गरीब और बेसहारा कन्याओं का विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ करवाया जाता है। साथ ही बागेश्वर धाम की तरफ से बेटी(वधु ) को गृहस्थी में उपयोग होने वाला हर सामान उपहार स्वरुप दिया जाता है।

गौ रक्षा

हमारे देश में गाय को माता की तरह पूजा जाता है और इसका मान दुनियाभर के हिन्दू करे इसके लिए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री(Bageshwar Dham Sarkar) ने नारा दिया है – “गौशाला नहीं उपाय, एक हिन्दू…एक गाय”। बागेश्वर धाम सरकार का मानना है कि अगर आप एक गाय नहीं भी रख सकते हैं तो अगर आपके आसपास कोई गरीब गाय पाल रहा है तो आप हर महीने उसे ही कुछ धनराशि दे दें ताकि वह गरीब गाय को भरण – पोषण कर सके और उस गाय से जो दूध हो उससे अपने परिवार का भरण – पोषण कर पाएगा।

गौ रक्षा
गौ रक्षा

आम तौर गाय पालने वाले गरीबी के कारण गाय को खुला शहर में छोड़ देते है जिससे गाय बाहर कुछ खा के फिर घर वापस आ जाये। लेकिन गाय जब बाहर जाती है तो कचरे वाली जगह पर भी चली जाती है जंहा वो पॉलीथिन ,कीटनाशक जैसी चीजे भी सब्जियों के माध्यम से निगल लेती है और उनकी मृत्यु हो जाती है।यह समस्या शहरी इलाको में ज्यादा होती है।

बागेश्वर बागीचा

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बागेश्वर बागीचा

ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनियाभर में इन दिनों पर्यावरण की रक्षा के लिए कई जरुरी कदम उठाए जा रहे हैं। क्योंकि पेड़ धरती पर ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बनाये रखते है। वंही मिटटी को भी संरक्षित रखते है और पंक्षियो का भी घर बसाते है तभी तो महाराजश्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया और देशभर में बागेश्वर बागीचा बनाने का फैसला किया। मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में कई बागेश्वर बागीचा का निर्माण भी किया जा चुका है।

वैदिक गुरुकुल

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वैदिक गुरुकुल

हम जानते है की संस्कृत हमारी प्राचीन भाषा थी और वेदो का भी समाज निर्माण में योगदान रहा है लेकिन समय के साथ साथ इसका उपयोग कम होने लगा है। पूज्य गुरुदेव की सोच है कि भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार दुनियाभर में हो। बागेश्वर धाम के प्रांगण में एक वैदिक गुरुकुल की स्थापना की जा रही है, जहां बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ साथ वेदों का भी ज्ञान दिया जाएगा।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अवार्ड

बागेश्वर धाम सरकार ने अपनी वेबसाइट में निम्न पुरस्कारों को बताया है

World Book Of Records Europe

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को 12 जून 2022 में धर्म जागरूकता के प्रति विशेष योगदान के लिए वर्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड यूरोप(world book of records europe) की और से प्रमाण पत्र दिया गया।

Shant Shiromani

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को 14 जून 2022 में अपने क्षेत्र समुदाय में निरंतर सामाजिक योगदान एवं कार्य के लिए शांत शिरोमणि(Shant Shiromani) का प्रमाण पत्र मिला जो हाउस ऑफ़ कॉमन्स लंदन(at the house of commons london)में दिया गया।

World Book of Records London

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को 12 जुलाई 2022 में भागवत गीता के ज्ञान को प्रसारित करने के लिए वर्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड लंदन(World Book of Records London) की तरफ से प्रमाणपत्र मिला।

बागेश्वर धाम में बालाजी क्या है

बागेश्वर धाम बालाजी का अर्थ बागेश्वर धाम में स्थित हनुमानजी से है। बागेश्वर धाम में हनुमानजी का मंदिर है हनुमानजी को ही हम बालाजी ,बजरंगबलि आदि नामो से जानते है। बागेश्वर धाम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी को हनुमानजी की कृपा प्राप्त है और हनुमानजी इन्ही के माध्यम से भक्तो के दुखो का निराकरण करते है। बालाजी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के इष्ट देव भी है।

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बागेश्वर धाम में बालाजी Source:https://bageshwardham.co.in/

बागेश्वर धाम क्यों प्रसिद्ध है

बागेश्वर धाम की प्रसिद्धि वंहा उपस्थित बालाजी के चमत्कारों पर आश्रित है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम में बैठक करते है जंहा वंहा उपस्थित भक्त लोग उनके सामने अपनी समस्याओ की अर्जी लगाते है। जिसमे भूत प्रेत लगे हुए लोग भी आते है। भूत प्रेत लगे हुए लोगो को वह अपने हाथ के इशारो से ही ठीक कर देते है। जब लोग अर्जी ले कर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सामने बैठते है तो वह व्यक्ति के बारे में कागज पर पहले से ही वह लिख देते है जो वह व्यक्ति समस्या ले कर आता है।

बागेश्वर धाम कहाँ है

मध्यप्रदेश में बागेश्वर धाम उतना ही प्रसिद्ध है जितना कुबरेश्वर धाम। यह मध्यप्रदेश में भक्तो द्वारा पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। बागेश्वर धाम मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा गाँव में स्थित है। अगर आप छतरपुर में है तो आप लोकल ऑटो ,मैजिक ,वैन आदि के द्वारा बागेश्वर धाम जा सकते है। अगर आप खजुराओ में है तो वंहा से भी इन्ही तरह के वाहनों को उपयोग कर जा सकते है।

बागेश्वर धाम की स्थिति देखने के लिए गूगल मैप पर क्लिक कीजिये।

बागेश्वर धाम से नजदीकी रेलवे स्टेशन

ट्रेन से बागेश्वर धाम पहुंचने के लिए आपको बागेश्वर धाम का सबसे नजदीकी और बड़ा रेलवे स्टेशन खजुराहो रेलवे स्टेशन देखना होगा ,जो बागेश्वर धाम से लगभग 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। इसके अलावा आप छतरपुर के रेलवे स्टेशन पर भी अपने स्थान के द्वारा जा सकते है। इसके अलावा आपको भोपाल से छतरपुर या खजुराओ की और जाने वाली ट्रैन की स्थिति को देखना होगा।

बागेश्वर धाम नजदीकी एयरपोर्ट

प्लेन से बागेश्वर धाम पहुंचने के लिए आपको खजुराओ की और आने वाली flight की स्थिति को अपने स्थान से देखना होगा।

बागेश्वर धाम पता

बागेश्वर धाम
ग्राम – गढ़ा, पोस्ट – गंज, जिला – छतरपुर
मध्य प्रदेश, पिन – 471105

बागेश्वर धाम के द्वारा उनसे संपर्क करने के लिए अपनी वेबसाइट पर यह Mobile Number दिए है

  • 8982862921
  • 8120592371

बागेश्वर धाम All Social Media Account

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बागेश्वर धाम में अर्जी कैसे लगती है?

बागेश्वर धाम में अर्जी लगाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए आपको यह करना होता है कि आप जब धाम पर आते हैं तो आपको लाल कपड़े में एक नारियल बांध कर धाम परिसर में रखना होता है। हालांकि यहां आप लाल, पीले और काले कपड़े में बंधा नारियल देखेंगे। इसके पीछे की वजह ये है कि अगर आपकी अर्जी सामान्य है तो और लाल कपड़े में नारियल बांधे, अगर शादी-विवाह से जुड़ी अर्जी है तो नारियल को पीले कपड़े में बांधे और अगर अर्जी प्रेत बाधा से जुड़ी है तो नारियल को काले कपड़े में बांधे।

कई बार अपनी कथाओं में भी पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि अगर आप धाम आकर ऐसा नहीं कर सकते तो अपने घर में स्थित पूजा स्थल पर आप ऐसा कर सकते हैं। बागेश्वर बालाजी महाराज आपकी अर्जी को अवश्य सुनेंगे।

कैसे लगाए बागेश्वर धाम में घर बैठे अर्जी

  • एक लाल रंग का कपड़ा ले।
  • एक नारियल ले।
  • अर्जी को बांधना है।
  • “ॐ बागेश्वराय नमः ” इस मंत्र का जाप करें।
  • इस मंत्र की एक माला करना है।
  • लहसुन प्याज़ आज से ही छोड़ना है।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करे ।
  • घर पर बैठकर आप इसको कर सकते है।
  • नारियल को अपने पूजा मंदिर में रख ले।
  • आप जब कभी बागेश्वर धाम जाए इस नारियल को धाम में बाँध दे और अगर ना जाए तो घर पर ही बंधा रहने दे।

FAQ:

बागेश्वर धाम टोकन क्या है ?

टोकन का अर्थ हम अपॉइंटमेंट जैसा समझ सकते है। क्योंकि भीड़ के कारण बागेश्वर धाम में व्यवस्था को सँभालने के लिए टोकन निर्धारित किये जाते है।

बागेश्वर धाम अर्जी क्या है ?

अर्जी का अर्थ हमारी उस समस्या को लेना है जिसका हम निराकरण चाहते है। जैसे किसी बीमारी से ठीक होने की अर्जी ,किसी कार्य में सफलता की अर्जी आदि

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के गुरु

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार अपना गुरु बालाजी महाराज को मानते है। हनुमानजी की कृपा से ही उन्हें दिव्या शक्तियां मिली है। इसके अलावा सन्यासी बाबा जी और अपने दादा जी श्री श्री 1008 दादा गुरु जी महाराज को भी अपना गुरु मानते है।

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