Chandra Grah Ke Upay चंद्र ग्रह को मजबूत करने के उपाय और मंत्र

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Chandra Grah Ke Upay:चन्द्रमा मन को मन का कारक बताया गया है। वही चन्द्रमा रक्त का भी कारक है क्योंकि शरीर में रक्त की गति सबसे तेज होती है वैसे ही चन्द्रमा की ग्रहो में गति तेज होती है।चंद्रमा सबसे गति वाला ग्रह है और उसकी गति में सर्वदा परिवर्तन होता है, इसलिए जहां गति से जुड़ी बातें आ जायं, वहां चंद्रमा महत्वपूर्ण हो जाता है।चंद्रमा की गति काफी तीव्र होने से राशि परिवर्तन सवा दो दिन में कर लेता है। कुंडली में चन्द्रमा जिस राशि में होता है उससे ही व्यक्ति की राशि का निर्माण होता है। चंद्रमा को मातृकारक कहा गया है।

चंद्र को मजबूत करने के उपाय ,Chandra Grah Ke Upay

चन्द्रमा की एक खासियत यह है की इसकी एक ही आकृति पृथ्वी से नजर आती है इसकी दूसरी आकृति कभी नजर नहीं आती उसे Dark Side Of The Moon कहते है।

चंद्र ग्रह के बारे में जानकारी (Chandra Grah in astrology)

चन्द्रमा वृष राशि में स्थित होकर सर्वाधिक बलशाली हो जाते हैं तथा इस राशि में स्थित चन्द्रमा को उच्च का चन्द्रमा कहा जाता है। वृष के अतिरिक्त चन्द्रमा कर्क राशि में स्थित होने से भी बलवान हो जाते हैं जो कि चन्द्रमा की अपनी राशि है।कुंडली में चन्द्रमा के बलहीन होने पर अथवा किसी बुरे ग्रह के प्रभाव में आकर दूषित होने पर जातक की मानसिक शांति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा उसे मिलने वाली सुख-सुविधाओं में भी कमी आ जाती है। चन्द्रमा वृश्चिक राशि में स्थित होकर बलहीन हो जाते हैं ।

इसके अतिरिक्त कुंडली में अपनी स्थिति विशेष और अशुभ ग्रहों के प्रभाव के कारण भी चन्द्रमा बलहीन हो जाते हैं। किसी कुंडली में अशुभ राहु तथा केतु का प्रबल प्रभाव चन्द्रमा को बुरी तरह से दूषित कर सकता है तथा कुंडली धारक को मानसिक रोगों से पीड़ित भी कर सकता है।इसलिए कुंडली में चन्द्रमा को मजबूत (Chandra Grah Ke Upay) करना आवश्यक है।

चंद्रमा के जन्म की पौराणिक कथा (Chandra janm katha)

स्कन्द पुराण के अनुसार जब देवों तथा दैत्यों ने क्षीर सागर का मंथन किया था तो उस में से चौदह रत्न निकले थे। चंद्रमा उन्हीं चौदह रत्नों में से एक है जिसे लोक कल्याण हेतु, उसी मंथन से प्राप्त कालकूट विष को पी जाने वाले भगवान शंकर ने अपने मस्तक पर धारण कर लिया। पर ग्रह के रूप में चन्द्र की उपस्थिति मंथन से पूर्व भी सिद्ध होती है। 

स्कन्द पुराण के ही माहेश्वर खंड में गर्गाचार्य ने समुद्र मंथन का मुहूर्त निकालते हुए देवों को कहा कि इस समय सभी ग्रह अनुकूल हैं। चंद्रमा से गुरु का शुभ योग है।  तुम्हारे कार्य की सिद्धि के लिए चन्द्र बल उत्तम है। यह गोमन्त मुहूर्त तुम्हें विजय देने वाला है। अतः यह संभव है कि चंद्रमा के विभिन्न अंशों का जन्म विभिन्न कालों में हुआ हो। चन्द्र का विवाह दक्ष प्रजापति की नक्षत्र रुपी 27 कन्याओं से हुआ जिनसे अनेक प्रतिभाशाली पुत्र हुए। इन्हीं 27 नक्षत्रों के भोग से एक चन्द्र मास पूर्ण होता है। 

चंद्र ग्रह के मंत्र (Chandra Grah Mantra)

चंद्र ग्रह की शांति के लिए विभिन्न मंत्रो को उपयोग किया जाता है।

चंद्र वैदिक मंत्र (Chandra Vedic Mantra)

ॐ इमं देवा असपत्नं ग्वं सुवध्यं । महते क्षत्राय महते ज्यैश्ठाय महते
जानराज्यायेन्दस्येन्द्रियाय इमममुध्य पुत्रममुध्यै पुत्रमस्यै
विश वोsमी राज: सोमोsस्माकं ब्राह्माणाना ग्वं राजा।।

स्नान तथा दान काल में यह मंत्र का उच्चारण लाभप्रद होता है।

चंद्र तात्रिंक मंत्र (Chandra Tantrik Mantra)

ॐ ऎं क्लीं सोमाय नम: ।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नम: ।
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

चंद्र बीज मंत्र के जाप करने का सर्वोत्तम समय पूर्णिमा की रात का है। इस मंत्र की १८ मालाये जपना चाहिए।चन्द्रमा के जप की संख्या 11000 है।

चंद्र गायत्री मंत्र (Chandra Gayatri Mantra)

ॐ पद्मद्वाजय विद्महे हेमा रूपाय धीमहि तन्नो चंद्र: प्रचोदयात्

अर्थ – मैं कमल ध्वज धारण करने वाले चंद्रमा भगवान के सामने नतमस्तक हूं। वह एक सोने के रंग भांति चमकदार हैं। चंद्र देव मेरे मन को प्रबुद्ध करें और मेरा मार्ग रोशन करें।

चंद्र ग्रह के उपाय (Chandra grah ke upay)

आराध्य देव

चन्द्रमा के आराध्य देव भगवान शिव है। शिव चन्द्रमा को सिर पर धारण करते है।

चंद्र के लिए हवन

चन्द्रमा के लिए पलाश की समिधा का प्रयोग किया जाता है।

चंद्र के लिए दान

चन्द्रमा के लिए चावल, सफेद वस्त्र, शंख, वंशपात्र, सफेद चंदन, श्वेत पुष्प, चीनी, बैल, दही और मोती दान करना चाहिए।

चंद्र के लिए औषधि स्नान

चंद्र के स्नान के लिए पंचगव्य, चांदी मोती, सीप, श्वेत चंदन, स्फटिक,शंख और कुमुदिनी के फूल। इन सब को जल में डाल कर उससे स्नान करे।

सोमवार व्रत

सोमवार व्रत में व्यक्ति को प्रातः स्नान करके शिव जी को जल और बिलपत्र चढ़ाना चाहिए तथा शिव-गौरी की पूजा करनी चाहिए। शिव पूजन के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी चाहिए। सोमवार का व्रत 5 या 11 या 43 बार करें।

ग्रह पीड़ा निवृत्ति हेतु चंद्र यंत्र (Chandra Yantra)

चन्द्र ग्रह की शान्ति हेतु चन्द्र होरा में चांदी के पत्र में चन्द्र यंत्र खुदवाकर या अष्टगन्ध से भोजपत्र पर लिखकर उसकी विधिवत, पूजन कर गले या दाहिनी भुजा में धारण करना चाहिए।

chandra yantra photo ,चंद्र यंत्र

चंद्र के लिए रत्न धारण (gemstone for Moon)

चन्द्रमा का रत्न मोती चाँदी की अंगूठी में बनवाकर सोमवार को कच्चे दूध एवं गंगा जल से धो कर, प्राण प्रतिष्ठा ब्राह्मणों से करा कर या चंद्र के किसी तांत्रिक मंत्र को ग्यारह बार पढ़ कर सीधे हाथ की कनिष्टिका उंगली में धारण करना चाहिए।

चन्द्रमा के लिए आप मूनस्टोन को भी धारण कर सकते है।

चंद्र के लिए रुद्राक्ष

चन्द्रमा के लिए 2 मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जाता है। 2 मुखी रुद्राक्ष नेपाल का होना चाहिए।

2 मुखी रुद्राक्ष नहीं मिलने पर 5 मुखी रुद्राक्ष को 40 दिनों तक शिव के रूप में पूजना चाहिए और फिर इसे लाल धागे में धारण करना चाहिए।

चंद्र के लिए औषधि धारण

चन्द्रमा के लिए खिरनी की जड़ को सोमवार के दिन धारण करें। खिरनी की जड़ सफेद मोती के समान काम करती है इसका चयन सोमवार के दिन ही करें।

चंद्र के लिए सामान्य उपाय Chandra Grah Ke Upay Remedies

  • शिव जी से जुड़े और उनका पूजन करें।
  • अमरनाथ जी की यात्रा या पूजन करें।
  • द्वादश ज्योर्तिलिंगों की यात्रा करें या पूजन करें।
  • चावल, चांदी, दूध आदि का दान करें।
  • भगवान शिव का पूजन सोमवार के दिन करना तथा पूर्ण चन्द्र के दिन चन्द्रमा को अर्घ्य प्रदान करने से चन्द्र ग्रह की शांति हो जाती है।
  • चारपाई के पायों में चांदी की कील लगाना चाहिए।।
  • पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए।
  • चंद्रमा उच्च का हो तो चंद्र की चीजों का दान न देना।
  • चंद्र नीच का हो तो चंद्र की चीजों का दान न लेना।
  • घर में दूषित जल का संग्रह नहीं होना चाहिए।
  • घर के उत्तर-पश्चिमी कोने में गुलाबी रंग का बल्ब लगाएं और दिन ढलते ही उसे जला दें।
  • जल को बरबाद करने से बचें। अपने घर के खराब नलों को जल्द से जल्द ठीक करवाएं।
  • हमेशा अपने घर में चांदी की एक थाली रखें।
  • सफेद सुगंधित पुष्प वाले पौधे घर में लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
  • सोमवार के दिन मीठा दूध नहीं पीना चाहिए।
  • चंद्र ख़राब वाले को रात को दूध नहीं पीना चाहिए।
  • वर्षा का पानी काँच की बोतल में भरकर घर में रखना चाहिए।
  • दुर्गा देवी की पूजा करें तथा कन्याओं को भोजन और मिठाई देकर उनके पांव छुएं और आशिर्वाद लें।
  • चाँदी का कड़ा धारण करे।
  • रुद्राक्ष माला धारण करे।
  • शिव चालीसा का नियमित पाठ करें।
  • चंद्र पीड़ा की विशेष शांति हेतु चांदी, मोती, शंख, सीप, कमल और पंचगव्य मिलाकर सात सोमवार तक स्नान करें।
  • पंच धातु के शिवलिंग का निर्माण करके उसका यथायोग्य पूजन करने से चंद्र पीड़ा शांत होती है।

आप अपनी कुंडली की स्थिति को देखकर चंद्र ग्रह के विभिन्न उपायों को प्रयोग में ला सकते है। चंद्र के उपाय (Chandra Grah Ke Upay) से सम्बन्धी किसी भी जानकारी के लिए आप कमेंट कर सकते है। अगर आपको पोस्ट पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे।

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