कर्कोटक काल सर्प दोष क्या है | Karkotak Kaal Sarp Dosh in Hindi

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Karkotak Kaal Sarp Dosh in Hindi: 12 कालसर्प दोषो में यह 8 वे स्थान पर होता है। यह दोष कुलिक काल सर्प दोष के ठीक विपरीत होता है जिसमे केतु दूसरे स्थान पर और राहु अष्टम स्थान पर होता है।

कर्कोटक सर्प को कई जादुई शक्तियों के लिए जाना जाता था । उनके माता-पिता ऋषि कश्यप और कद्रू थे और कर्कोटक नागों के राजा शेषनाग , वासुकी और तक्षक का भाई था । हिंदू पौराणिक कथाओं में कर्कोटक द्वारा निभाई गई सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका नल और दमयंती की कहानी में है। कर्कोटक नाग के वंशज आज राजस्थान में बसे हुए हैं और कटेवा के नाम से जाने जाते हैं।

Karkotak kaal sarp dosh in hindi, कर्कोटक काल सर्प दोष क्या है

कर्कोटक कालसर्प दोष कब बनता है

कर्कोटक कालसर्प दोष कुलिक कालसर्प दोष की ही तरह होता है लेकिन इसमें राहु अष्टम में और केतु दूसरे स्थान में होता है। और इस योग के परिणाम भी कुलिक की तरह ही होते है। यंहा केतु धन भाव पर स्थित होने पर आकस्मिक धन प्रदाता बन जाता है। राहु की दृष्टि भी दूसरे स्थान पर होती है। केतु की पंचम दृष्टि छटे स्थान पर होने पर यह ऋण और रोग को प्रभावित करती है। केतु की नवम दृष्टि कर्म स्थान पर होने पर यह दशम स्थान के कारकत्वों को प्रभावित करती है।

Karkotak Kaal Sarp Dosh kundali example

इस दोष में (Karkotak Kaal Sarp Dosh) राहु की पंचम दृष्टि 12 वे स्थान पर होती है जो खर्च को प्रभावित करती है। और नवम दृष्टि चतुर्थ भाव पर होती है जो सुख स्थान और मन को प्रभावित करती है।

कर्कोटक कालसर्प दोष के लक्षण (Karkotak Kaal Sarp Dosh Effects)

कर्कोटक कालसर्प दोष होने पर व्यक्ति के जीवन में कुछ समस्या देखि जाती है जो इस प्रकार है-

  • ककरोट कालसर्प दोष धन प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी है।
  • ककरोट कालसर्प दोष दोष करियर की प्रगति में भी बाधा डाल सकता है क्योंकि आपको नौकरी पाने और अच्छी तरह से पदोन्नति पाने में कई बाधाएं आ सकती हैं।
  • ककरोट कालसर्प दोष से ग्रसित लोगों को भी सच बोलने की आदत हो जाती है। यह एक अच्छी बात लग सकती है। लेकिन यह आदत जातक को अपने लिए अच्छे सौदे हासिल करने से रोक सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको सच नहीं बोलना चाहिए। लेकिन किसी से भी बात करने से पहले आपको जरूर सोचना चाहिए।
  • कभी-कभी तो उन्हें (Karkotak Kaal Sarp Dosh) बड़े पद से छोटे पद पर काम करने का भी दंड भुगतना पड़ता है।
  • राहु की दृष्टि दूसरे स्थान पर होने पर यह कुटुंब से सम्बन्धो को प्रभावित करती है।
  • राहु की दृष्टि दूसरे स्थान पर होने पर यह व्यक्ति की वाणी को कठोर और अप्रिय बनाती है।
  • व्यक्ति को मानसिक समस्या जैसे अवसाद की स्थिति हो सकती है।
  • व्यक्ति को वाहन से समस्या हो सकती है।
  • व्यक्ति धन को व्यर्थ बर्बाद कर सकता है जैसे जुआ आदि में।
  • पैतृक संपत्ति से भी ऐसे जातकों को मनोनुकूल लाभ नहीं मिल पाता।
  • व्यापार में भी समय-समय पर क्षति होती रहती है।
  • कोई भी काम बढ़िया से चल नहीं पाता।
  • कठिन परिश्रम के बावजूद उन्हें पूरा लाभ नहीं मिलता।
  • मित्रों से धोखा मिलता है।
  • शारीरिक रोग व मानसिक परेशानियों से व्यथित जातक को अपने कुटुंब व रिश्तेदारों के बीच भी सम्मान नहीं मिलता।
  • चिड़चिड़ा स्वभाव व मुंहफट बोली से उसे कई झगड़ों में फंसना पड़ता है।
  • उसका उधार दिया पैसा भी डूब जाता है।
  • शत्रू षड़यंत्र व अकाल मृत्यु का जातक को बराबर भय बना रहता है।

कर्कोटक कालसर्प दोष कितने वर्ष तक रहता है (Karkotak Kaal Sarp Dosh Time Period)

ऐसा माना जाता है की कर्कोटक कालसर्प दोष व्यक्ति के जीवन को जन्म से 27 वर्ष तक प्रभावित करता है। इस दोष का प्रभाव कितना होगा यह इस बात पर निर्भर करता है की अन्य ग्रह जैसे मंगल ,गुरु ,शुक्र कितने पीड़ित है अगर पीड़ित है तो विवाह में समस्या होगी तथा चन्द्रमा पीड़ित है तो मानसिक समस्या जैसे अवसाद की स्थिति भी बन सकती है।

इसके बाद इस दोष (Karkotak Kaal Sarp Dosh) का प्रभाव कम होने लग जाता है। लेकिन 27 वर्ष की उम्र तक व्यक्ति की शिक्षा ,रोजगार आदि प्रभावित हो जाता है।अगर विवाह जल्दी हो जाता है तो विवाह या सगाई का टूटना ,विवाह बाद समस्या तथा संतान सम्बंधित समस्या आदि को देखा जाता है।

कर्कोटक कालसर्प दोष सकारात्मक पहलु (Karkotak Kaal Sarp Dosh Positive Effects)

कर्कोटक कालसर्प दोष का सकारात्मक पहलु यह है की यह दोष में अगर राहु केतु और अन्य ग्रह बलवान स्थिति में है तो यह आकस्मिक धन प्रदान कर सकता है। यह व्यापार के क्षेत्र में उन्नति प्रदान कर सकता है।

कर्कोटक कालसर्प दोष के उपाय (Karkotak Kaal Sarp Dosh Remedies)

  • हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें और पांच मंगलवार का व्रत करते हुए हनुमान जी को चमेली के तेल में घुला सिंदूर व बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
  • काल सर्प दोष निवारण यंत्रा घर में स्थापित कर उसका प्रतिदिन पूजन करें।
  • उज्जैन में कर्कोटकेश्वर मंदिर है जंहा जो कर्कोटकेश्वर शिव के दर्शन करता है उसे सर्पो का भय नहीं रहता न ही वह दरिद्र रहता है और उसे उज्जैन की यात्रा का फल मिलता है।
  • शनिवार को कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना मुंह देख एक सिक्का अपने सिर पर तीन बार घुमाते हुए तेल में डाल दें और उस कटोरी को किसी शनि मंदिर में रख दे।
  • सवा महीने तक जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं और प्रत्येक शनिवार को चींटियों को शक्कर मिश्रित आता उनके बिलों पर डालें।
  • अपने सोने वाले कमरे में लाल रंग के पर्दे, चादर व तकियों का प्रयोग करें।
  • ऑनलाइन गेम्स ,जुआ ,सट्टा आदि में धन खर्च करने से बचे।
  • वाहन को सावधानी पूर्वक चलाये।
  • अपने सोने वाले कमरे में लाल रंग के पर्दे, चादर व तकियों का प्रयोग करें।
  • मन की स्थिति के लिए प्राणायाम करे।
  • नित्य व्यायाम कीजिये।
  • किसी को पैसा उधर मत दीजिये न किसी से पैसा उधर लीजिये।
  • इस दोष में किसी को दिया पैसा अक्सर वापस नहीं आता इसलिए पैसा ऐसी जगह दीजिये जंहा से वापस न आये तो भी नुकसान न हो जैसे वृद्धा आश्रम में ,किसी गरीब छात्र को पढ़ाई के लिए या किसी को अस्पताल आदि के लिए।
  • कर्कोटक कालसर्प योग होने पर बटुकभैरव के मंदिर में जाकर दही-गुड़ का भोग लगाएं और पूजा करें।
  • किसी शुभ मुहूर्त में नारियल गोले को बहते जल में तीन बार प्रवाहित करें।
  • किसी शुभ मुहूर्त में शनिवार के दिन बहते पानी में तीन बार कोयला भी प्रवाहित करें।
  • चांदी के बने शिव यंत्र को गले में धारण करें।
  • माथे पर तिलक लगाएं।
  • अपने गले में सोमवार, मंगलवार और शनिवार के दिन लाल धागे में 8 मुखी रुद्राक्ष 2 दाने , 9 मुखी रुद्राक्ष 2 दाने और 13 मुखी रुद्राक्ष 3 दानें धारण करें।
  • शनिवार से शुरू होकर 27 दिन तक चीटियों को बूंदी के लड्डू खिलाएं।
  • तांबे में त्रिकोणीय मूंगा रत्न दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करें।लेकिन इसके लिए कुंडली में मंगल की स्थिति को देख ले।

उपरोक्त उपाय से के बाद भी संतान ,विवाह आदि में परेशानी आ रही हो तो काल सर्प दोष की पूजा जरूर करवाइये।साथ ही कुंडली में यह भी देखिये की कंही मंगल दोष तो नहीं बन रहा।

के उपरोक्त लक्षण होने पर भी व्यक्ति का जीवन सामान्य हो सकता है क्योंकि कुंडली में ग्रहो की स्थिति और षोडश वर्ग कुंडली में ग्रहो का स्थान अलग अलग हो जाता है इसलिए उपरोक्त लक्षण कुंडली में होने पर घबराना नहीं चाहिए और योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना चाहिए।

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