पार्थिव शिवलिंग पूजा की वैदिक विधि मंत्र Parthiv Shivling Vedic Puja Vidhi Mantra

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Parthiv Shivling Vedic Puja Vidhi:श्रावण और महाशिवरात्रि के त्यौहार आ जाने पर शिव भक्त हर शिव मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए नजर आ जाते है ।इस दिन शिव जी की पूजा करने का खास विधान है । परन्तु ऐसा देखने में आता हैं की मंदिर कई बार घर से दूर होता है या मंदिर में भीड़ होती है ऐसे में पार्थिव शिवलिंग के निर्माण करके उसका पूजन किया जाता है जो आप अपने घर पर कर सकते है । हमारी पार्थिव शिवलिंग पूजा की पहली विधि तो आपने पढ़ी होगी जिसमे काफी मंत्र थे परन्तु इस वैदिक विधि में शिव पंचाक्षर मंत्र या दीक्षा स्वरुप कोई शिव मंत्र हो उससे पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया जाता है ।

Parthiv Shivling Vedic Puja Vidhi Mantra

पार्थिव शिवलिंग वैदिक पूजा विधि(Parthiv Shivling Vedic Puja Vidhi)

ऋचा सद्योजातमिति मृदाहरणमाचरेत्।
वामदेवाय इति च जलप्रक्षेपमाचरेत्।।39।।

“सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः। भवे भवे नातिभवे भवस्य मां भवोद्भवाय नमः।।” इस ऋचा से पार्थिव शिवलिङ्ग बनाने के लिये मिट्टी ले आये। “ॐ वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः कालाय नमः कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमो बलाय नमो बलप्रमथनाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मथाय नमः।।” इत्यादि पार्थिव शिवलिंग पूजा मंत्र पढ़कर मिट्टी में जल डालें।।39।।

अघोरेण च मन्त्रेण लिङ्गनिर्माणमाचरेत्।
तत्पुरुखाय मन्त्रेणाह्वानं कुर्याद्यथाविधि।।40।।

जब मिट्टी सनकर तैयार हो जाय तब “ॐ अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्ते अस्तुऽरूद्र रुपेभ्यः।” पार्थिव शिवलिंग पूजा मंत्र पढ़ते हुए शिवलिङ्ग निर्माण करे। फिर “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।” इस मंत्र से विधिवत उसमें भगवान शिव का आवाहन करे।।40।।

संयोजयेद्वेदिकायामीशानमनुना हरम्।
अन्यत्सर्वं विधानं च कुर्यात्संक्षेपतः सुधीः।।41।।

“ॐ ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणो धिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तुऽसदा शिवोम्।” मंत्र से भगवान शिव को वेदी पर स्थापित करे। इनके सिवाय अन्य सब विधानों को भी शुद्ध बुद्धि वाला उपासक संक्षेप से ही सम्पन्न करे।।41।।

पञ्चाक्षरेण मन्त्रेण गुरुदत्तेन वा तथा।
कुर्यात्पूजां षोडशोपचारेण विधिवत्सुधीः।।42।।

इसके बाद विद्वान पुरुष पार्थिव शिवलिंग पूजा पञ्चाक्षर मंत्र ( नमः शिवाय) से अथवा गुरु के दिये हुये अन्य किसी भगवान शिव सम्बन्धी मंत्र से सोलह उपचारों द्वारा विधिवत पूजन करे।।42।।

shiv panchakshar mantra in hindi

भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमहि।
उग्राय उग्रनाशाय शर्वाय शशिमौलिने।।43।।

अनेन मनुना वापि पूजयेच्छङ़्करं सुधीः।
सुभक्त्या च भ्रमं त्यक्त्वा भक्त्यैव फलदः शिवः।।44।।

इस पार्थिव शिवलिंग पूजा मंत्र द्वारा विद्वान उपासक भगवान शिव की पूजा करे। वह भ्रम छोड़कर उत्तम भक्ति भाव से भगवान शिव की आराधना करे, क्योंकि भगवान शिव भक्ति से ही मनोवांक्षित फल देते हैं।।43-44।।

इत्यपि प्रोक्तमादृत्य वैदिकं क्रमपूजनम्।
प्रोच्यतेऽन्यवविधिः सम्यक्साधारणतया द्विजाः।।45।।

ब्राह्मणो! यहाँ जो पार्थिव शिवलिंग पूजन वैदिक विधि से पूजन का क्रम बताया गया है, इसका पूर्ण रूप से आदर करता हुआ मैं पूजा की एक दूसरी विधि भी बता रहा हूँ, जो उत्तम होने के साथ ही सर्व साधारण के लिये उपयोगी है।।45।।

“इति श्रीशिवमहापुराणे प्रथमायां विद्येश्वर संहितायां साध्यसाधन खण्डे पार्थिव शिवलिङ्ग पूजनविधिवर्णनं नाम विंशोऽध्यायः।।20।।

यह श्री शिव महापुराण की प्रथम विद्याश्वर संहिता का साध्य साधना खंड का बीसवाँ अध्याय है, जिसका शीर्षक पार्थिव शिव लिंग की पूजा करने की विधि का वर्णन है।।20।।”

शिवपूजन करते समय आप रुद्राक्ष की माला अवश्य धारण करे अगर रुद्राक्ष की माला नहीं है तो एक रुद्राक्ष भी धारण कर सकते है ।इसके साथ ही भस्म(विभूति )को भी धारण करना चाहिए इससे पूजा में उत्तम फल मिलता है ।

यह पूजन विधि श्री शिवपुराण से ली गयी है अगर आपके पास शिव पुराण है तो आप उसके द्वारा भी पूजन कर सकते पार्थिव शिवलिंग पूजन की यह वैदिक विधि (Parthiv Shivling Vedic Puja Vidhi) अत्यंत सरल है क्योंकि इसमें एक ही मंत्र को प्रयोग में लाया जाता है ।पार्थिव शिवलिंग पूजन की अन्य विधि का वर्णन आप अगली पोस्ट में देखेंगे ।मिटटी के शिवलिंग का निर्माण कैसे करे यह भी हमने हमारी पोस्ट में शामिल किया है ।इस पोस्ट में कोई राय देना चाहते है तो हमें जरूर बताये ।

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