रुद्राक्ष दीक्षा क्या है|What is Rudraksha Diksha in Hindi

Rudraksha Diksha:ईशा योग के संस्थापक सद्गुरु(Sadhguru Jaggi Vasudev) द्वारा हर साल महाशिवरात्रि पर आदियोगी के समक्ष लाखो पंचमुखी रुद्राक्ष को प्राण प्रतिष्ठित किया जाता है। फिर सद्गुरु इन्ही रुद्राक्ष को अपने शिष्यों तथा महाशिवरात्रि में उपस्थित लोगो को प्रदान करते है। महाशिवरात्रि पर होने वाला यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक चलता है। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विभिन्न टीवी चेनलो और ऑनलाइन YouTube ,फेसबुक आदि पर भी होता है। जो लोग इस कार्यक्रम को देखते है वह भी एक हिस्सा होते है।

इसलिए इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ईशा फाउंडेशन ने इन रुद्राक्ष को रुद्राक्ष दीक्षा के फलस्वरूप हर व्यक्ति के लिए उपलभ्ध करा दिया हैं।सद्गुरु और आदियोगी के समक्ष दी गयी यही दीक्षा रुद्राक्ष दीक्षा(Rudraksha Diksha) के नाम से जानी जाती है।

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रुद्राक्ष दीक्षा में क्या आता है(Rudraksha Diksha Unboxing)

रुद्राक्ष दीक्षा के पैकेट में आपको पांच मुखी रुद्राक्ष ,अभय सूत्र ,विभूति और आदियोगी की फोटो मिलती है। इसके साथ मिट्टी बचाओ अभियान की जानकारी और रुद्राक्ष की जानकारी मिलती है।

पांच मुखी रुद्राक्ष(5 Mukhi Rudraksha)

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Source:mahashivarathri.org

रुद्राक्ष दीक्षा में ५ मुखी रुद्राक्ष मिलते है वो भारतीय या नेपाली ५ मुखी रुद्राक्ष हो सकते है। पहले Rudraksha Diksha Registration में आपको कितने रुद्राक्ष चाहिए यानि १,२ या ३ रुद्राक्ष के बारे में पूछा जाता था लेकिन अब 2 रुद्राक्ष आपको मिलेंगे। यह रुद्राक्ष आपको एक छोटे लिफाफे में मिलते है या एक काले कपडे में बंधे हुए मिलते है।

ईशा विभूति(Isha Vibhuti)

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Source:mahashivarathri.org

विभूति को भभूति या भभूत(भस्म) भी कहा जाता है। यह गाय के उपलों की राख होती है।
ईशा फाउंडेशन में विभूति को पारंपरिक तरीके से गाय के गोबर से तैयार किया जाता है। इसके लिए देशी नस्ल की गायों के गोबर का ही उपयोग किया जाता है।विभूति जब ठीक से लागू किया जाता है तो यह किसी की ग्रहणशीलता को बढ़ा सकता है।विभूति जब ध्यानलिंग के क्षेत्र में एक निश्चित अवधि के लिए रखी जाती है, तो इस शक्तिशाली रूप की ऊर्जा से भर जाती है।

प्राणप्रतिष्ठित आदियोगी अभय सूत्र(Rudraksha Diksha Abhaya Sutra)

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Source:mahashivarathri.org

अभय सूत्र एक काला सूती धागा होता है जो एक निश्चित अवधि के लिए ध्यानलिंग के क्षेत्र में प्राण प्रतिष्ठित किया जाता है ।इस पवित्र धागे को ऊर्जा को अवशोषित करने के जाना जाता है।

आदियोगी शिव की फोटो(Adiyogi Photo)

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Source:mahashivarathri.org

पहले योगी जिन्होंने योग विज्ञान की दीक्षा दी।

रुद्राक्ष दीक्षा कैसे धारण करे(how to use rudraksha diksha kit)

अब हमें रुद्राक्ष दीक्षा के पैकेट से प्राप्त सामग्री का उपयोग किस प्रकार करना है इसके लिए हम निम्न चीजों को अपनाएंगे-

रुद्राक्ष दीक्षा रुद्राक्ष(how to use Rudraksha Diksha Rudraksha)

सबसे पहले रुद्राक्ष दीक्षा में मिले रुद्राक्ष की कंडीशनिंग करेंगे। कंडीशनिंग(conditioning) का अर्थ है शुद्ध करना। क्योंकि रुद्राक्ष दीक्षा किट विभिन्न माध्यमों से होकर हमारे पास आता है। Conditioning करने के लिए रुद्राक्ष को २४ घंटे के लिए गाय के घी में डुबोकर रख देंगे। २४ घंटे बाद रुद्राक्ष को घी से निकालकर गाय के दूध में डुबोकर रख देंगे। अब इस रुद्राक्ष को २४ घंटो तक दूध में रहने देंगे फिर निकालकर पवित्र जल से धो लेंगे और सूती कपडे की सहायता से रुद्राक्ष को साफ़ कर लेंगे।

अभय सूत्र(How to use Abhaya Sutra)

अब आपको जो अभय सूत्र मिला है उसमे एक अभय सूत्र की लम्बाई अधिक है और एक की लम्बाई कम। कम लम्बाई वाले धागे को रुद्राक्ष में पिरो लेंगे। इसके लिए आप एक पतले तार का इस्तेमाल कर सकते है। अगर आप किसी और रंग के धागे में यह रुद्राक्ष पहनना चाहते है तो उसमे भी पहन सकते है। इस प्रकार आप रुद्राक्ष को अपने गले में धारण कर लीजिये।

अब अधिक लम्बाई वाला अभय सूत्र को आपको अपनी कलाई पर बांधना है। पुरुष अपने दाये हाथ की कलाई और स्त्री अपनी बाये हाथ की कलाई पर बांधे। इस अभय सूत्र को आप कम से कम ४० दिनों तक अपनी कलाई पर रहने दे उसके बाद अगर आप इसे निकलना चाहते है तो इसे हाथो से खोल ले या फिर जला कर हटा दे। इसे चाकू या कैंची जैसे धारदार चीजों से नहीं निकाले। अभय सूत्र निकलने के बाद आप इसे किसी नदी में बहा दे या फिर जला दे।

विभूति(How to use Rudraksha Diksha Vibhuti)

  • ईशा विभूति का प्रयोग करने के लिए अपने अंगूठे और अनामिका के बीच बस एक चुटकी विभूति लें।जीवन को ज्ञान के रूप में प्राप्त करने के लिए भौंहों के बीच के बिंदु पर लगाएं, जिसे आज्ञा चक्र कहा जाता है।
  • जीवन को शक्ति के रूप में प्राप्त करने के लिए गले के गड्ढे में, जिसे विशुद्धि चक्र के रूप में जाना जाता है वहां लगाए।
  • इसके बाद विभूति को छाती के केंद्र में जहां पंजर मिलता है, जिसे अनाहत चक्र के रूप में जाना जाता है, जीवन को प्रेम के रूप में प्राप्त करने के लिए लगाए।
  • इसके बाद कान के पीछे की जगह पर लगाए।

आदियोगी शिव की फोटो(How to use Adiyogi Photo)

आदियोगी शिव की फोटो को आप अपने पूजन कक्ष ,कार्यस्थल या कंप्यूटर डेस्क(computer desk) ,स्टडी टेबल(study table) पर लगा सकते है।

रुद्राक्ष दीक्षा के फायदे(Rudraksha Diksha Benefits)

  • यह रुद्राक्ष दीक्षा व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक संतुलन के लिए सहायक है।
  • यह साधक को साधना में सहायता प्रदान करता है। एक सरल लेकिन शक्तिशाली साधना सीखें जिसका आप अपने ऊर्जावान रुद्राक्ष के साथ रोजाना अभ्यास कर सकते हैं।
  • रुद्राक्ष दीक्षा में मिले पांच मुखी रुद्राक्ष के अनेक फायदे है।
  • अभय सूत्र नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
  • यह व्यक्ति की आभा को स्वच्छ करता है।
  • यह नकारात्मक ऊर्जाओं के खिलाफ एक ढाल है।
  • रुद्राक्ष दीक्षा आदियोगी की कृपा के लिए सुलभ होने का एक शक्तिशाली साधन है।

ईशा रुद्राक्ष दीक्षा कैसे प्राप्त करे(how to get Rudraksha diksha)

ईशा रुद्राक्ष दीक्षा प्राप्त करने के लिए आपको ईशा की वेबसाइट पर जा कर रजिस्ट्रेशन करना होगा। आप ईशा रुद्राक्ष रजिस्ट्रेशन के लिए निम्न वेबसाइट पर जा कर वंहा अपनी जानकारी भर सकते है।

अगर आपको रुद्राक्ष दीक्षा रजिस्ट्रेशन में अपनी जानकारी भरने में कोई चीज समझ में नहीं आ रही तो आप हमारा आर्टिकल ईशा रुद्राक्ष दीक्षा रजिस्ट्रेशन कैसे करे पर क्लिक करे। यंहा आपको पूरी जानकारी मिलेगी।

Rudraksha Diksha FAQ:

क्या रुद्राक्ष दीक्षा के रुद्राक्ष को चाँदी में बनवा सकते है।

हाँ ,चाँदी में पहनना चाहते हे तो बनवा सकते है।

क्या Rudraksha Diksha में मिले रुद्राक्ष को कोई भी पहन सकता है ?

हाँ ,इन रुद्राक्ष को कोई भी धारण कर सकता है।

रुद्राक्ष में धागा छोटा पड़ रहा हो तो क्या करे ?

आप बाजार से दूसरा धागा जैसे लाल ,पीला आदि में पहन सकते है।

अभय सूत्र ४० दिनों के अंदर निकाल दे तो क्या होगा ?

अभय सूत्र का पूर्ण लाभ आपको ४० दिनों के बाद ही मिलता है। इसलिए इसे ४० सिनो तक धारण करना चाहिए।

अगर रुद्राक्ष की कंडीशनिंग के लिए घी नहीं हो तो क्या करे ?

आप सरसो तेल ,तिल तेल आदि को प्रयोग में ला सकते है।

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