चंद्र ग्रह

चंद्र (चंद्र) मन, माता, भावनाएँ, स्मृति का कारक है। इसका वार सोमवार और रत्न मोती है।

मुख्य तथ्य

संस्कृत नामचंद्र
कारकमन, माता, भावनाएँ, स्मृति
रत्नमोती
धारण का दिनसोमवार
मंत्रॐ चंद्राय नमः
स्वराशिकर्क
उच्च राशिवृषभ
नीच राशिवृश्चिक
मित्र ग्रहसूर्य, बुध
शत्रु ग्रह
विंशोत्तरी दशा10 वर्ष

चंद्र की दशा

विंशोत्तरी पद्धति में चंद्र की महादशा 10 वर्ष की होती है। इस अवधि में मन, माता, भावनाएँ, स्मृति से जुड़े विषय जीवन के केंद्र में आ जाते हैं। दशा का फल इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्र कुंडली में किस भाव में और किस राशि में बैठा है — उच्च राशि वृषभ में होने पर अनुकूल और नीच राशि वृश्चिक में होने पर संघर्षपूर्ण।

मज़बूत चंद्र के लक्षण

कुंडली में चंद्र बलवान हो तो मन, माता, भावनाएँ, स्मृति से जुड़े क्षेत्रों में सहजता रहती है, आत्मविश्वास बना रहता है और इन विषयों के निर्णय समय पर लिए जाते हैं।

कमज़ोर चंद्र के लक्षण

चंद्र कमज़ोर या पीड़ित होने पर मन, माता, भावनाएँ, स्मृति से जुड़े मामलों में बार-बार विलंब, भ्रम या असंतोष दिखता है। यह पूर्ण निर्णय नहीं है — भाव-स्थिति और दशा देखना आवश्यक है।

सुझाए गए उपाय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्र ग्रह किसका कारक है?

चंद्र मन, माता, भावनाएँ, स्मृति का कारक माना जाता है।

चंद्र का रत्न और वार कौन-सा है?

चंद्र का रत्न मोती और वार सोमवार है। रत्न धारण से पहले परामर्श आवश्यक है।

चंद्र का मंत्र क्या है?

ॐ चंद्राय नमः — इसका जाप सोमवार को करना विशेष फलदायी माना जाता है।