गुरु ग्रह
गुरु (गुरु / बृहस्पति) ज्ञान, धन, संतान, धर्म का कारक है। इसका वार गुरुवार और रत्न पुखराज है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | गुरु / बृहस्पति |
|---|---|
| कारक | ज्ञान, धन, संतान, धर्म |
| रत्न | पुखराज |
| धारण का दिन | गुरुवार |
| मंत्र | ॐ गुरवे नमः |
| स्वराशि | धनु, मीन |
| उच्च राशि | कर्क |
| नीच राशि | मकर |
| मित्र ग्रह | सूर्य, चंद्र, मंगल |
| शत्रु ग्रह | बुध, शुक्र |
| विंशोत्तरी दशा | 16 वर्ष |
गुरु की दशा
विंशोत्तरी पद्धति में गुरु की महादशा 16 वर्ष की होती है। इस अवधि में ज्ञान, धन, संतान, धर्म से जुड़े विषय जीवन के केंद्र में आ जाते हैं। दशा का फल इस बात पर निर्भर करता है कि गुरु कुंडली में किस भाव में और किस राशि में बैठा है — उच्च राशि कर्क में होने पर अनुकूल और नीच राशि मकर में होने पर संघर्षपूर्ण।
मज़बूत गुरु के लक्षण
कुंडली में गुरु बलवान हो तो ज्ञान, धन, संतान, धर्म से जुड़े क्षेत्रों में सहजता रहती है, आत्मविश्वास बना रहता है और इन विषयों के निर्णय समय पर लिए जाते हैं।
कमज़ोर गुरु के लक्षण
गुरु कमज़ोर या पीड़ित होने पर ज्ञान, धन, संतान, धर्म से जुड़े मामलों में बार-बार विलंब, भ्रम या असंतोष दिखता है। यह पूर्ण निर्णय नहीं है — भाव-स्थिति और दशा देखना आवश्यक है।
सुझाए गए उपाय
- गुरुवार को ॐ गुरवे नमः का 108 बार जाप।
- गुरुवार को संबंधित वस्तु का दान।
- पुखराज धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाएँ।
- किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराना सभी ग्रहों के लिए सामान्य और सुरक्षित उपाय है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुरु ग्रह किसका कारक है?
गुरु ज्ञान, धन, संतान, धर्म का कारक माना जाता है।
गुरु का रत्न और वार कौन-सा है?
गुरु का रत्न पुखराज और वार गुरुवार है। रत्न धारण से पहले परामर्श आवश्यक है।
गुरु का मंत्र क्या है?
ॐ गुरवे नमः — इसका जाप गुरुवार को करना विशेष फलदायी माना जाता है।