केतु ग्रह
केतु (केतु) वैराग्य, मोक्ष, पूर्वजन्म-कौशल का कारक है। इसका वार मंगलवार और रत्न लहसुनिया है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | केतु |
|---|---|
| कारक | वैराग्य, मोक्ष, पूर्वजन्म-कौशल |
| रत्न | लहसुनिया |
| धारण का दिन | मंगलवार |
| मंत्र | ॐ केतवे नमः |
| स्वराशि | वृश्चिक (सह-स्वामी) |
| उच्च राशि | वृश्चिक |
| नीच राशि | वृषभ |
| मित्र ग्रह | मंगल, गुरु |
| शत्रु ग्रह | चंद्र, शुक्र |
| विंशोत्तरी दशा | 7 वर्ष |
केतु की दशा
विंशोत्तरी पद्धति में केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है। इस अवधि में वैराग्य, मोक्ष, पूर्वजन्म-कौशल से जुड़े विषय जीवन के केंद्र में आ जाते हैं। दशा का फल इस बात पर निर्भर करता है कि केतु कुंडली में किस भाव में और किस राशि में बैठा है — उच्च राशि वृश्चिक में होने पर अनुकूल और नीच राशि वृषभ में होने पर संघर्षपूर्ण।
मज़बूत केतु के लक्षण
कुंडली में केतु बलवान हो तो वैराग्य, मोक्ष, पूर्वजन्म-कौशल से जुड़े क्षेत्रों में सहजता रहती है, आत्मविश्वास बना रहता है और इन विषयों के निर्णय समय पर लिए जाते हैं।
कमज़ोर केतु के लक्षण
केतु कमज़ोर या पीड़ित होने पर वैराग्य, मोक्ष, पूर्वजन्म-कौशल से जुड़े मामलों में बार-बार विलंब, भ्रम या असंतोष दिखता है। यह पूर्ण निर्णय नहीं है — भाव-स्थिति और दशा देखना आवश्यक है।
सुझाए गए उपाय
- मंगलवार को ॐ केतवे नमः का 108 बार जाप।
- मंगलवार को संबंधित वस्तु का दान।
- लहसुनिया धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाएँ।
- किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराना सभी ग्रहों के लिए सामान्य और सुरक्षित उपाय है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केतु ग्रह किसका कारक है?
केतु वैराग्य, मोक्ष, पूर्वजन्म-कौशल का कारक माना जाता है।
केतु का रत्न और वार कौन-सा है?
केतु का रत्न लहसुनिया और वार मंगलवार है। रत्न धारण से पहले परामर्श आवश्यक है।
केतु का मंत्र क्या है?
ॐ केतवे नमः — इसका जाप मंगलवार को करना विशेष फलदायी माना जाता है।