राहु ग्रह

राहु (राहु) महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक का कारक है। इसका वार शनिवार और रत्न गोमेद है।

मुख्य तथ्य

संस्कृत नामराहु
कारकमहत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक
रत्नगोमेद
धारण का दिनशनिवार
मंत्रॐ राहवे नमः
स्वराशिकुंभ (सह-स्वामी)
उच्च राशिवृषभ
नीच राशिवृश्चिक
मित्र ग्रहशुक्र, शनि
शत्रु ग्रहसूर्य, चंद्र, मंगल
विंशोत्तरी दशा18 वर्ष

राहु की दशा

विंशोत्तरी पद्धति में राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है। इस अवधि में महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक से जुड़े विषय जीवन के केंद्र में आ जाते हैं। दशा का फल इस बात पर निर्भर करता है कि राहु कुंडली में किस भाव में और किस राशि में बैठा है — उच्च राशि वृषभ में होने पर अनुकूल और नीच राशि वृश्चिक में होने पर संघर्षपूर्ण।

मज़बूत राहु के लक्षण

कुंडली में राहु बलवान हो तो महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में सहजता रहती है, आत्मविश्वास बना रहता है और इन विषयों के निर्णय समय पर लिए जाते हैं।

कमज़ोर राहु के लक्षण

राहु कमज़ोर या पीड़ित होने पर महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक से जुड़े मामलों में बार-बार विलंब, भ्रम या असंतोष दिखता है। यह पूर्ण निर्णय नहीं है — भाव-स्थिति और दशा देखना आवश्यक है।

सुझाए गए उपाय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहु ग्रह किसका कारक है?

राहु महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक का कारक माना जाता है।

राहु का रत्न और वार कौन-सा है?

राहु का रत्न गोमेद और वार शनिवार है। रत्न धारण से पहले परामर्श आवश्यक है।

राहु का मंत्र क्या है?

ॐ राहवे नमः — इसका जाप शनिवार को करना विशेष फलदायी माना जाता है।