शनि ग्रह

शनि (शनि) अनुशासन, कर्म, विलंब, आयु का कारक है। इसका वार शनिवार और रत्न नीलम है।

मुख्य तथ्य

संस्कृत नामशनि
कारकअनुशासन, कर्म, विलंब, आयु
रत्ननीलम
धारण का दिनशनिवार
मंत्रॐ शनये नमः
स्वराशिमकर, कुंभ
उच्च राशितुला
नीच राशिमेष
मित्र ग्रहबुध, शुक्र
शत्रु ग्रहसूर्य, चंद्र, मंगल
विंशोत्तरी दशा19 वर्ष

शनि की दशा

विंशोत्तरी पद्धति में शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है। इस अवधि में अनुशासन, कर्म, विलंब, आयु से जुड़े विषय जीवन के केंद्र में आ जाते हैं। दशा का फल इस बात पर निर्भर करता है कि शनि कुंडली में किस भाव में और किस राशि में बैठा है — उच्च राशि तुला में होने पर अनुकूल और नीच राशि मेष में होने पर संघर्षपूर्ण।

मज़बूत शनि के लक्षण

कुंडली में शनि बलवान हो तो अनुशासन, कर्म, विलंब, आयु से जुड़े क्षेत्रों में सहजता रहती है, आत्मविश्वास बना रहता है और इन विषयों के निर्णय समय पर लिए जाते हैं।

कमज़ोर शनि के लक्षण

शनि कमज़ोर या पीड़ित होने पर अनुशासन, कर्म, विलंब, आयु से जुड़े मामलों में बार-बार विलंब, भ्रम या असंतोष दिखता है। यह पूर्ण निर्णय नहीं है — भाव-स्थिति और दशा देखना आवश्यक है।

सुझाए गए उपाय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शनि ग्रह किसका कारक है?

शनि अनुशासन, कर्म, विलंब, आयु का कारक माना जाता है।

शनि का रत्न और वार कौन-सा है?

शनि का रत्न नीलम और वार शनिवार है। रत्न धारण से पहले परामर्श आवश्यक है।

शनि का मंत्र क्या है?

ॐ शनये नमः — इसका जाप शनिवार को करना विशेष फलदायी माना जाता है।