शुक्र ग्रह

शुक्र (शुक्र) प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख का कारक है। इसका वार शुक्रवार और रत्न हीरा है।

मुख्य तथ्य

संस्कृत नामशुक्र
कारकप्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख
रत्नहीरा
धारण का दिनशुक्रवार
मंत्रॐ शुक्राय नमः
स्वराशिवृषभ, तुला
उच्च राशिमीन
नीच राशिकन्या
मित्र ग्रहबुध, शनि
शत्रु ग्रहसूर्य, चंद्र
विंशोत्तरी दशा20 वर्ष

शुक्र की दशा

विंशोत्तरी पद्धति में शुक्र की महादशा 20 वर्ष की होती है। इस अवधि में प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख से जुड़े विषय जीवन के केंद्र में आ जाते हैं। दशा का फल इस बात पर निर्भर करता है कि शुक्र कुंडली में किस भाव में और किस राशि में बैठा है — उच्च राशि मीन में होने पर अनुकूल और नीच राशि कन्या में होने पर संघर्षपूर्ण।

मज़बूत शुक्र के लक्षण

कुंडली में शुक्र बलवान हो तो प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख से जुड़े क्षेत्रों में सहजता रहती है, आत्मविश्वास बना रहता है और इन विषयों के निर्णय समय पर लिए जाते हैं।

कमज़ोर शुक्र के लक्षण

शुक्र कमज़ोर या पीड़ित होने पर प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख से जुड़े मामलों में बार-बार विलंब, भ्रम या असंतोष दिखता है। यह पूर्ण निर्णय नहीं है — भाव-स्थिति और दशा देखना आवश्यक है।

सुझाए गए उपाय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुक्र ग्रह किसका कारक है?

शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख का कारक माना जाता है।

शुक्र का रत्न और वार कौन-सा है?

शुक्र का रत्न हीरा और वार शुक्रवार है। रत्न धारण से पहले परामर्श आवश्यक है।

शुक्र का मंत्र क्या है?

ॐ शुक्राय नमः — इसका जाप शुक्रवार को करना विशेष फलदायी माना जाता है।