नीलम रत्न
नीलम शनि ग्रह का रत्न है। इसे शनिवार को चांदी या पंचधातु में मध्यमा उंगली में धारण करने की परंपरा है।
मुख्य तथ्य
| ग्रह | शनि |
|---|---|
| उंगली | मध्यमा |
| धातु | चांदी या पंचधातु |
| धारण का दिन | शनिवार |
| उपरत्न | कटैला, लाजवर्त |
| सामान्य वज़न | 3–5 carat |
उपरत्न — सस्ता विकल्प
नीलम महँगा होने पर इसका उपरत्न कटैला, लाजवर्त धारण किया जाता है। उपरत्न का प्रभाव धीमा माना जाता है, इसलिए इसका वज़न मुख्य रत्न से अधिक रखा जाता है। सामान्य वज़न 3–5 carat के बीच सुझाया जाता है, परंतु यह जातक के शरीर-भार और कुंडली दोनों पर निर्भर करता है।
किसे नहीं पहनना चाहिए
यदि आपकी कुंडली में शनि छठे, आठवें या बारहवें भाव का स्वामी है, तो नीलम धारण करना सामान्यतः वर्जित माना जाता है, क्योंकि इससे उस भाव का प्रभाव भी बढ़ता है। गर्भावस्था, चल रही चिकित्सा या मानसिक तनाव की स्थिति में नया रत्न आरंभ करने से पहले परामर्श विशेष रूप से आवश्यक है।
किसे पहनना चाहिए
नीलम उन जातकों के लिए बताया जाता है जिनकी कुंडली में शनि शुभ भाव का स्वामी होकर कमज़ोर स्थिति में हो। यदि शनि अशुभ भाव का स्वामी है तो यह रत्न लाभ के बदले हानि दे सकता है।
धारण विधि
- शनिवार के दिन प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में धारण करें।
- धारण से पहले रत्न को कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध करें।
- शनि के मंत्र का 108 बार जाप करें।
- रत्न त्वचा से स्पर्श करता रहे, यह आवश्यक माना जाता है।
सावधानी: नीलम, गोमेद और लहसुनिया को परीक्षण अवधि के बाद ही स्थायी रूप से धारण करना चाहिए। किसी भी रत्न से पहले योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाना आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नीलम किस ग्रह का रत्न है?
नीलम शनि ग्रह का रत्न है और इसे शनिवार को धारण करना शुभ माना जाता है।
नीलम किस उंगली में पहनें?
परंपरा के अनुसार नीलम को चांदी या पंचधातु में जड़वाकर मध्यमा उंगली में धारण किया जाता है।
क्या नीलम कोई भी पहन सकता है?
नहीं। रत्न कुंडली में ग्रह की भाव-स्थिति देखकर ही पहनना चाहिए, अन्यथा यह प्रतिकूल प्रभाव दे सकता है।