लहसुनिया रत्न
लहसुनिया केतु ग्रह का रत्न है। इसे मंगलवार को चांदी में मध्यमा उंगली में धारण करने की परंपरा है।
मुख्य तथ्य
| ग्रह | केतु |
|---|---|
| उंगली | मध्यमा |
| धातु | चांदी |
| धारण का दिन | मंगलवार |
| उपरत्न | लहसुनिया क्वार्ट्ज़ |
| सामान्य वज़न | 5–8 carat |
उपरत्न — सस्ता विकल्प
लहसुनिया महँगा होने पर इसका उपरत्न लहसुनिया क्वार्ट्ज़ धारण किया जाता है। उपरत्न का प्रभाव धीमा माना जाता है, इसलिए इसका वज़न मुख्य रत्न से अधिक रखा जाता है। सामान्य वज़न 5–8 carat के बीच सुझाया जाता है, परंतु यह जातक के शरीर-भार और कुंडली दोनों पर निर्भर करता है।
किसे नहीं पहनना चाहिए
यदि आपकी कुंडली में केतु छठे, आठवें या बारहवें भाव का स्वामी है, तो लहसुनिया धारण करना सामान्यतः वर्जित माना जाता है, क्योंकि इससे उस भाव का प्रभाव भी बढ़ता है। गर्भावस्था, चल रही चिकित्सा या मानसिक तनाव की स्थिति में नया रत्न आरंभ करने से पहले परामर्श विशेष रूप से आवश्यक है।
किसे पहनना चाहिए
लहसुनिया उन जातकों के लिए बताया जाता है जिनकी कुंडली में केतु शुभ भाव का स्वामी होकर कमज़ोर स्थिति में हो। यदि केतु अशुभ भाव का स्वामी है तो यह रत्न लाभ के बदले हानि दे सकता है।
धारण विधि
- मंगलवार के दिन प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में धारण करें।
- धारण से पहले रत्न को कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध करें।
- केतु के मंत्र का 108 बार जाप करें।
- रत्न त्वचा से स्पर्श करता रहे, यह आवश्यक माना जाता है।
सावधानी: नीलम, गोमेद और लहसुनिया को परीक्षण अवधि के बाद ही स्थायी रूप से धारण करना चाहिए। किसी भी रत्न से पहले योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाना आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लहसुनिया किस ग्रह का रत्न है?
लहसुनिया केतु ग्रह का रत्न है और इसे मंगलवार को धारण करना शुभ माना जाता है।
लहसुनिया किस उंगली में पहनें?
परंपरा के अनुसार लहसुनिया को चांदी में जड़वाकर मध्यमा उंगली में धारण किया जाता है।
क्या लहसुनिया कोई भी पहन सकता है?
नहीं। रत्न कुंडली में ग्रह की भाव-स्थिति देखकर ही पहनना चाहिए, अन्यथा यह प्रतिकूल प्रभाव दे सकता है।