पुखराज रत्न
पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है। इसे गुरुवार को सोना में तर्जनी उंगली में धारण करने की परंपरा है।
मुख्य तथ्य
| ग्रह | गुरु |
|---|---|
| उंगली | तर्जनी |
| धातु | सोना |
| धारण का दिन | गुरुवार |
| उपरत्न | टोपाज़, सुनहला |
| सामान्य वज़न | 4–7 carat |
उपरत्न — सस्ता विकल्प
पुखराज महँगा होने पर इसका उपरत्न टोपाज़, सुनहला धारण किया जाता है। उपरत्न का प्रभाव धीमा माना जाता है, इसलिए इसका वज़न मुख्य रत्न से अधिक रखा जाता है। सामान्य वज़न 4–7 carat के बीच सुझाया जाता है, परंतु यह जातक के शरीर-भार और कुंडली दोनों पर निर्भर करता है।
किसे नहीं पहनना चाहिए
यदि आपकी कुंडली में गुरु छठे, आठवें या बारहवें भाव का स्वामी है, तो पुखराज धारण करना सामान्यतः वर्जित माना जाता है, क्योंकि इससे उस भाव का प्रभाव भी बढ़ता है। गर्भावस्था, चल रही चिकित्सा या मानसिक तनाव की स्थिति में नया रत्न आरंभ करने से पहले परामर्श विशेष रूप से आवश्यक है।
किसे पहनना चाहिए
पुखराज उन जातकों के लिए बताया जाता है जिनकी कुंडली में गुरु शुभ भाव का स्वामी होकर कमज़ोर स्थिति में हो। यदि गुरु अशुभ भाव का स्वामी है तो यह रत्न लाभ के बदले हानि दे सकता है।
धारण विधि
- गुरुवार के दिन प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में धारण करें।
- धारण से पहले रत्न को कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध करें।
- गुरु के मंत्र का 108 बार जाप करें।
- रत्न त्वचा से स्पर्श करता रहे, यह आवश्यक माना जाता है।
सावधानी: नीलम, गोमेद और लहसुनिया को परीक्षण अवधि के बाद ही स्थायी रूप से धारण करना चाहिए। किसी भी रत्न से पहले योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाना आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुखराज किस ग्रह का रत्न है?
पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है और इसे गुरुवार को धारण करना शुभ माना जाता है।
पुखराज किस उंगली में पहनें?
परंपरा के अनुसार पुखराज को सोना में जड़वाकर तर्जनी उंगली में धारण किया जाता है।
क्या पुखराज कोई भी पहन सकता है?
नहीं। रत्न कुंडली में ग्रह की भाव-स्थिति देखकर ही पहनना चाहिए, अन्यथा यह प्रतिकूल प्रभाव दे सकता है।