सूर्य ग्रह
सूर्य (सूर्य) आत्मा, पिता, सत्ता, जीवन-शक्ति का कारक है। इसका वार रविवार और रत्न माणिक है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | सूर्य |
|---|---|
| कारक | आत्मा, पिता, सत्ता, जीवन-शक्ति |
| रत्न | माणिक |
| धारण का दिन | रविवार |
| मंत्र | ॐ सूर्याय नमः |
| स्वराशि | सिंह |
| उच्च राशि | मेष |
| नीच राशि | तुला |
| मित्र ग्रह | चंद्र, मंगल, गुरु |
| शत्रु ग्रह | शुक्र, शनि |
| विंशोत्तरी दशा | 6 वर्ष |
सूर्य की दशा
विंशोत्तरी पद्धति में सूर्य की महादशा 6 वर्ष की होती है। इस अवधि में आत्मा, पिता, सत्ता, जीवन-शक्ति से जुड़े विषय जीवन के केंद्र में आ जाते हैं। दशा का फल इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य कुंडली में किस भाव में और किस राशि में बैठा है — उच्च राशि मेष में होने पर अनुकूल और नीच राशि तुला में होने पर संघर्षपूर्ण।
मज़बूत सूर्य के लक्षण
कुंडली में सूर्य बलवान हो तो आत्मा, पिता, सत्ता, जीवन-शक्ति से जुड़े क्षेत्रों में सहजता रहती है, आत्मविश्वास बना रहता है और इन विषयों के निर्णय समय पर लिए जाते हैं।
कमज़ोर सूर्य के लक्षण
सूर्य कमज़ोर या पीड़ित होने पर आत्मा, पिता, सत्ता, जीवन-शक्ति से जुड़े मामलों में बार-बार विलंब, भ्रम या असंतोष दिखता है। यह पूर्ण निर्णय नहीं है — भाव-स्थिति और दशा देखना आवश्यक है।
सुझाए गए उपाय
- रविवार को ॐ सूर्याय नमः का 108 बार जाप।
- रविवार को संबंधित वस्तु का दान।
- माणिक धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाएँ।
- किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराना सभी ग्रहों के लिए सामान्य और सुरक्षित उपाय है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य ग्रह किसका कारक है?
सूर्य आत्मा, पिता, सत्ता, जीवन-शक्ति का कारक माना जाता है।
सूर्य का रत्न और वार कौन-सा है?
सूर्य का रत्न माणिक और वार रविवार है। रत्न धारण से पहले परामर्श आवश्यक है।
सूर्य का मंत्र क्या है?
ॐ सूर्याय नमः — इसका जाप रविवार को करना विशेष फलदायी माना जाता है।