ऐस्ट्रोलॉजी हिंदी संपादकीय टीम

संपादकीय टीम

हमारी संपादकीय टीम पारंपरिक ज्योतिष ग्रंथों और पंचांग के आधार पर सामग्री तैयार करती है, सरल हिंदी में और बिना किसी भय या अतिशयोक्ति के। किसी भी तथ्यात्मक त्रुटि की सूचना हमें अवश्य दें।

संपादकीय नीति

सभी लेख

मुहूर्त और पंचांग

विवाह मुहूर्त कैसे देखा जाता है: पंडित जी किन पाँच बातों की जाँच करते हैं

विवाह की तिथि तय करने में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की भूमिका, किन कालों से बचा जाता है, और गुरु तथा शुक्र का अस्त होना क्यों मायने रखता है।

नामकरण

नक्षत्र के अनुसार बच्चे का नाम: 27 नक्षत्रों के नामाक्षर की पूरी तालिका

जन्म नक्षत्र और चरण से नामकरण का अक्षर कैसे तय होता है, चारों चरणों के अक्षरों की पूरी सूची, और नामकरण संस्कार से जुड़ी परंपरागत बातें।

अंक ज्योतिष

मोबाइल नंबर और गाड़ी नंबर का अंक ज्योतिष: गणना का तरीक़ा

मोबाइल नंबर का अंक कैसे निकालें, कौन-सा अंक किस काम के लिए अनुकूल माना जाता है, गाड़ी नंबर की गणना, और इस विषय की सीमाएँ।

कुंडली

जन्म कुंडली कैसे पढ़ें: शुरुआत करने वालों के लिए छह चरण

कुंडली में सबसे पहले क्या देखें, लग्न का महत्व, बारह भाव, नौ ग्रह, और वह क्रम जिससे कोई भी व्यक्ति अपनी कुंडली को समझना शुरू कर सकता है।

दोष और परिहार

कालसर्प दोष: कितना डरना चाहिए और कितना नहीं

कालसर्प योग बनता कैसे है, इसके बारह प्रकार, यह कब निष्प्रभावी हो जाता है, और इस विषय पर ज्योतिषियों में मतभेद क्यों है।

दोष और परिहार

मंगल दोष क्या है: मांगलिक होने का सच, मिथक और परिहार

मंगल दोष कुंडली के किन भावों से बनता है, यह कब स्वतः समाप्त हो जाता है, और विवाह के निर्णय में इसे कितना महत्व देना चाहिए।

दोष और परिहार

शनि की साढ़ेसाती: कब शुरू होती है, क्या होता है और क्या नहीं होता

साढ़ेसाती साढ़े सात वर्ष तक चलती है और तीन चरणों में बँटी होती है। इसका सही अर्थ, तीनों चरणों का अलग-अलग प्रभाव, और वे उपाय जो वास्तव में परंपरा में बताए गए हैं।