कृत्तिका नक्षत्र
कृत्तिका नक्षत्र राशि चक्र का 3वाँ नक्षत्र है। इसका स्वामी ग्रह सूर्य है और यह मेष–वृषभ राशि में आता है। इसका चिह्न छुरा है, जो इस नक्षत्र की मूल प्रवृत्ति दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
| # | 3 |
|---|---|
| नक्षत्र स्वामी | सूर्य |
| राशि | मेष–वृषभ |
| चिह्न | छुरा |
| देवता | अग्नि |
| गण | राक्षस |
| योनि | बकरी |
| नाड़ी | अंत्य |
| विस्तार | 26°40′ – 40°0′ |
चार पद (नवांश)
प्रत्येक नक्षत्र 3°20′ के चार पदों में बँटा है और प्रत्येक पद एक नवांश राशि में पड़ता है। जन्म किस पद में हुआ, इससे नामकरण का अक्षर और स्वभाव की बारीकियाँ तय होती हैं।
स्वभाव व व्यक्तित्व
कृत्तिका नक्षत्र में जन्मे जातकों पर सूर्य का गहरा प्रभाव रहता है। ये स्वभाव से स्पष्ट लक्ष्य रखने वाले होते हैं और जिस कार्य में रुचि ले लें उसमें गहराई तक जाते हैं। मेष–वृषभ राशि का प्रभाव इनके निर्णय लेने की गति तय करता है।
करियर और कार्यक्षेत्र
सूर्य के कारक क्षेत्र इस नक्षत्र के जातकों के लिए अनुकूल रहते हैं। स्वतंत्र निर्णय लेने वाली भूमिकाएँ इन्हें अधिक संतोष देती हैं।
देवता और गण का अर्थ
कृत्तिका के अधिष्ठाता देवता अग्नि हैं, और इसका गण राक्षस है। गण स्वभाव की मूल प्रवृत्ति बताता है — देव गण सौम्य और सहयोगी, मानव गण संतुलित और व्यवहारिक, तथा राक्षस गण दृढ़ और स्पष्ट होता है। योनि बकरी है, जो स्वाभाविक अनुकूलता का संकेत देती है, और नाड़ी अंत्य है, जो कुंडली मिलान में सबसे अधिक भार रखती है।
शुभ कार्य और दिशा
सूर्य की प्रकृति के अनुसार कृत्तिका नक्षत्र में यात्रा आरंभ, शिक्षा, नए कार्य का शुभारंभ और सूर्य से जुड़े कार्य अनुकूल माने जाते हैं। पंचांग में यह नक्षत्र किस वार के साथ पड़ रहा है, यह भी मुहूर्त तय करने में देखा जाता है।
कुंडली मिलान में भूमिका
कुंडली मिलान के आठ कूटों में से तारा, योनि, गण और नाड़ी — चार कूट सीधे नक्षत्र से तय होते हैं, अर्थात् 36 में से 21 गुण। कृत्तिका की योनि बकरी, गण राक्षस और नाड़ी अंत्य होने के कारण इसका मिलान इन्हीं आधारों पर होता है। ध्यान रहे कि समान नाड़ी होने पर नाड़ी कूट के 8 गुण शून्य हो जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है और यह मेष–वृषभ राशि में पड़ता है।
कृत्तिका नक्षत्र में जन्म शुभ है?
प्रत्येक नक्षत्र की अपनी शक्ति है; कोई नक्षत्र स्वयं में अशुभ नहीं होता। फल कुंडली में चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।
कृत्तिका नक्षत्र से कुंडली मिलान में कितने गुण तय होते हैं?
नक्षत्र से तारा (3), योनि (4), गण (6) और नाड़ी (8) — कुल 21 गुण तय होते हैं।