पुष्य नक्षत्र

पुष्य नक्षत्र राशि चक्र का 8वाँ नक्षत्र है। इसका स्वामी ग्रह शनि है और यह कर्क राशि में आता है। इसका चिह्न गौ-स्तन है, जो इस नक्षत्र की मूल प्रवृत्ति दर्शाता है।

मुख्य तथ्य

#8
नक्षत्र स्वामीशनि
राशिकर्क
चिह्नगौ-स्तन
देवताबृहस्पति
गणदेव
योनिबकरी
नाड़ीमध्य
विस्तार93°20′ – 106°40′

चार पद (नवांश)

प्रत्येक नक्षत्र 3°20′ के चार पदों में बँटा है और प्रत्येक पद एक नवांश राशि में पड़ता है। जन्म किस पद में हुआ, इससे नामकरण का अक्षर और स्वभाव की बारीकियाँ तय होती हैं।

पदनवांश राशिस्वामी ग्रह
1सिंहसूर्य
2कन्याबुध
3तुलाशुक्र
4वृश्चिकमंगल

स्वभाव व व्यक्तित्व

पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातकों पर शनि का गहरा प्रभाव रहता है। ये स्वभाव से स्पष्ट लक्ष्य रखने वाले होते हैं और जिस कार्य में रुचि ले लें उसमें गहराई तक जाते हैं। कर्क राशि का प्रभाव इनके निर्णय लेने की गति तय करता है।

करियर और कार्यक्षेत्र

शनि के कारक क्षेत्र इस नक्षत्र के जातकों के लिए अनुकूल रहते हैं। स्वतंत्र निर्णय लेने वाली भूमिकाएँ इन्हें अधिक संतोष देती हैं।

देवता और गण का अर्थ

पुष्य के अधिष्ठाता देवता बृहस्पति हैं, और इसका गण देव है। गण स्वभाव की मूल प्रवृत्ति बताता है — देव गण सौम्य और सहयोगी, मानव गण संतुलित और व्यवहारिक, तथा राक्षस गण दृढ़ और स्पष्ट होता है। योनि बकरी है, जो स्वाभाविक अनुकूलता का संकेत देती है, और नाड़ी मध्य है, जो कुंडली मिलान में सबसे अधिक भार रखती है।

शुभ कार्य और दिशा

शनि की प्रकृति के अनुसार पुष्य नक्षत्र में यात्रा आरंभ, शिक्षा, नए कार्य का शुभारंभ और शनि से जुड़े कार्य अनुकूल माने जाते हैं। पंचांग में यह नक्षत्र किस वार के साथ पड़ रहा है, यह भी मुहूर्त तय करने में देखा जाता है।

कुंडली मिलान में भूमिका

कुंडली मिलान के आठ कूटों में से तारा, योनि, गण और नाड़ी — चार कूट सीधे नक्षत्र से तय होते हैं, अर्थात् 36 में से 21 गुण। पुष्य की योनि बकरी, गण देव और नाड़ी मध्य होने के कारण इसका मिलान इन्हीं आधारों पर होता है। ध्यान रहे कि समान नाड़ी होने पर नाड़ी कूट के 8 गुण शून्य हो जाते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है और यह कर्क राशि में पड़ता है।

पुष्य नक्षत्र में जन्म शुभ है?

प्रत्येक नक्षत्र की अपनी शक्ति है; कोई नक्षत्र स्वयं में अशुभ नहीं होता। फल कुंडली में चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।

पुष्य नक्षत्र से कुंडली मिलान में कितने गुण तय होते हैं?

नक्षत्र से तारा (3), योनि (4), गण (6) और नाड़ी (8) — कुल 21 गुण तय होते हैं।