पूर्व भाद्रपद नक्षत्र

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र राशि चक्र का 25वाँ नक्षत्र है। इसका स्वामी ग्रह गुरु है और यह कुंभ–मीन राशि में आता है। इसका चिह्न द्विमुख है, जो इस नक्षत्र की मूल प्रवृत्ति दर्शाता है।

मुख्य तथ्य

#25
नक्षत्र स्वामीगुरु
राशिकुंभ–मीन
चिह्नद्विमुख
देवताअजैकपाद
गणमानव
योनिसिंह
नाड़ीआदि
विस्तार320°0′ – 333°20′

चार पद (नवांश)

प्रत्येक नक्षत्र 3°20′ के चार पदों में बँटा है और प्रत्येक पद एक नवांश राशि में पड़ता है। जन्म किस पद में हुआ, इससे नामकरण का अक्षर और स्वभाव की बारीकियाँ तय होती हैं।

पदनवांश राशिस्वामी ग्रह
1मेषमंगल
2वृषभशुक्र
3मिथुनबुध
4कर्कचंद्र

स्वभाव व व्यक्तित्व

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातकों पर गुरु का गहरा प्रभाव रहता है। ये स्वभाव से स्पष्ट लक्ष्य रखने वाले होते हैं और जिस कार्य में रुचि ले लें उसमें गहराई तक जाते हैं। कुंभ–मीन राशि का प्रभाव इनके निर्णय लेने की गति तय करता है।

करियर और कार्यक्षेत्र

गुरु के कारक क्षेत्र इस नक्षत्र के जातकों के लिए अनुकूल रहते हैं। स्वतंत्र निर्णय लेने वाली भूमिकाएँ इन्हें अधिक संतोष देती हैं।

देवता और गण का अर्थ

पूर्व भाद्रपद के अधिष्ठाता देवता अजैकपाद हैं, और इसका गण मानव है। गण स्वभाव की मूल प्रवृत्ति बताता है — देव गण सौम्य और सहयोगी, मानव गण संतुलित और व्यवहारिक, तथा राक्षस गण दृढ़ और स्पष्ट होता है। योनि सिंह है, जो स्वाभाविक अनुकूलता का संकेत देती है, और नाड़ी आदि है, जो कुंडली मिलान में सबसे अधिक भार रखती है।

शुभ कार्य और दिशा

गुरु की प्रकृति के अनुसार पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में यात्रा आरंभ, शिक्षा, नए कार्य का शुभारंभ और गुरु से जुड़े कार्य अनुकूल माने जाते हैं। पंचांग में यह नक्षत्र किस वार के साथ पड़ रहा है, यह भी मुहूर्त तय करने में देखा जाता है।

कुंडली मिलान में भूमिका

कुंडली मिलान के आठ कूटों में से तारा, योनि, गण और नाड़ी — चार कूट सीधे नक्षत्र से तय होते हैं, अर्थात् 36 में से 21 गुण। पूर्व भाद्रपद की योनि सिंह, गण मानव और नाड़ी आदि होने के कारण इसका मिलान इन्हीं आधारों पर होता है। ध्यान रहे कि समान नाड़ी होने पर नाड़ी कूट के 8 गुण शून्य हो जाते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु है और यह कुंभ–मीन राशि में पड़ता है।

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्म शुभ है?

प्रत्येक नक्षत्र की अपनी शक्ति है; कोई नक्षत्र स्वयं में अशुभ नहीं होता। फल कुंडली में चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र से कुंडली मिलान में कितने गुण तय होते हैं?

नक्षत्र से तारा (3), योनि (4), गण (6) और नाड़ी (8) — कुल 21 गुण तय होते हैं।