Shiv Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi | जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में 2023

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हम हमारे घर के आस पास शिव मंदिरो में शिव जी की आरती नित्य सुनते है लेकिन जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में के बोल(Shiv Ji Ki Aarti Lyrics) क्या है यह हम नहीं जान पाते। इसलिए जब मंदिर में आरती चल रही होती है तो हमें आरती के लिरिक्स पता नहीं होते और हम सबके साथ बोल नहीं पाते। शिव जी की आरती का बड़ा ही महत्व होता है। माना जाता है भगवान शिव की आरती करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामना पूरी होती है और मन और घर में सुख शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है।

shiv ji ki aarti lyrics, जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में

शिव जी की आरती प्रायः हर शिव पुराण कथा के बाद होती है। इसके बाद सोलह सोमवार व्रत कथा ,सावन सोमवार व्रत कथा और सोमवार व्रत कथा के बाद शिव जी की आरती करने का विधान है। आइये देखते है (Shiv Ji Ki Aarti Lyrics)जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में

जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में Shiv Ji Ki Aarti Lyrics Hindi

Om Jai Shiv Omkara Aarti in Hindi

ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

एकानन चतुरानन
पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

दो भुज चार चतुर्भुज
दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते
त्रिभुवन जन मोहे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

अक्षमाला वनमाला,
मुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै,
भाले शशिधारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर
बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक
भूतादिक संगे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

कर के मध्य कमंडल
चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी
जगपालन कारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित
ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी
सुख संपति पावे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

लक्ष्मी व सावित्री
पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी,
शिवलहरी गंगा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

पर्वत सोहैं पार्वती,
शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन,
भस्मी में वासा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

जटा में गंग बहत है,
गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत,
ओढ़त मृगछाला ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

काशी में विराजे विश्वनाथ,
नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत,
महिमा अति भारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…॥

।। हर हर हर महादेव।।

Shiv Ji ki Aarti Lyrics With Hindi Meaning

जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में (Om Jai Shiv Omkara Meaning in Hindi)

ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

Om Jai Shiv Omkara

Om Jai Shiv Omkara Lyrics Meaning: हे भगवान शिव! आपकी जय हो। हे ॐ शब्द को रचने वाले भगवान शिव! आपकी जय हो। ब्रह्मा, विष्णु व सभी देवताओं के स्वरुप आप ही हो अर्थात सभी ईश्वर व देवता आप ही के रूप हैं। यहाँ भगवान शिव को त्रिदेव का रूप बताया गया है अर्थात वे ही ब्रह्मा हैं, वे ही विष्णु हैं और वे ही शिव हैं।

brahma vishnu mahesh shiv ji ki aarti

एकानन चतुरानन
पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

हिंदी अर्थ: आप ही एक मुख वाले नारायण हैं, आप ही चार मुख वाले परम ब्रह्मा हैं, आप ही पाँच मुख वाले भगवान शिव हैं। आप ही ब्रह्मा के वाहन हंस पर विराजते हैं, आप ही विष्णु के वाहन गरुड़ के वाहक हैं और आप ही शिव के वाहन नंदी के ऊपर विराजित हैं।

दो भुज चार चतुर्भुज
दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते
त्रिभुवन जन मोहे ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

shiv aarti meaning :ब्रह्मा की भांति आपकी दो भुजाएं हैं, विष्णु की भांति आपकी चार भुजाएं हैं व शिव की भांति दस भुजाएं हैं। आपके अंदर त्रिदेवों के गुण हैं और तीनों लोकों में आप सर्व गणमान्य के बीच प्रिय हो।

अक्षमाला वनमाला,
मुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै,
भाले शशिधारी ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में: ब्रह्मा की भांति रुद्राक्ष की माला, विष्णु की भांति सुगन्धित पुष्पों की माला तो शिव की भांति राक्षसों के कटे हुए सिर की माला आपने पहनी हुई है। ब्रह्मा की भांति चंदन का तिलक, विष्णु की भांति मृगमद कस्तूरी का तिलक तो शिव की भांति चंद्रमा आपके मस्तक पर सुशोभित है।

श्वेताम्बर पीताम्बर
बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक
भूतादिक संगे ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

Shiv Ji ki Aarti Lyrics Meaning:: आपने ब्रह्मा की भांति श्वेत वस्त्र, विष्णु की भांति पीले वस्त्र तो शिव की भांति बाघ की खाल के वस्त्र पहने हुए हैं। आपके साथ में ब्रह्मा जी के अनुयायी अर्थात ऋषि-मुनि व चारों वेद, विष्णु के अनुयायी गरुड़ व धर्मपालक, शिवजी के अनुयायी भूत, प्रेत इत्यादि हैं।

कर के मध्य कमंडल
चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी
जगपालन कारी ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

आपके हाथों में भगवान ब्रह्मा की भांति कमंडल, विष्णु की भांति चक्र तो शिव की भांति त्रिशूल है। आप ही ब्रह्मा की भांति इस विश्व का निर्माण करते हो, विष्णु की भांति इसका संचालन करते हो तो शिव की भांति इसका संहार करते हो।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित
ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

om shiv omkara meaning hindi: कोई अविवेकी व्यक्ति भी यह जान सकता है कि ब्रह्मा, विष्णु व सदाशिव आप ही के रूप हैं। ब्रह्मांड के प्रथम अक्षर ॐ के मध्य में ये तीनों ईश्वर विराजमान हैं।

त्रिगुणस्वामी जी की आरति
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी
सुख संपति पावे ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

स्वामी शिवानंद कहते हैं, “जो लोग इस आरती को तीन विशेषताओं वाले भगवान “सत्व (अच्छाई), रजस (साहस) और तमस (शांति)” के लिए पढ़ते हैं, उनकी इच्छाएँ पूरी होंगी”।

लक्ष्मी व सावित्री
पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी,
शिवलहरी गंगा ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

अर्थ: Shiv Ji Ki Aarti Lyrics in hindi (upadate soon)

पर्वत सोहैं पार्वती,
शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन,
भस्मी में वासा ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

हे शिव आप भांग धतूरे का भोजन करते है और आप भस्म में आप निवास करते है।

जटा में गंग बहत है,
गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत,
ओढ़त मृगछाला ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

shiv ji ganga nadi om shiv omkara

हे शिव आपकी जटाओ से गंगा जी बहती है। आपने अपने गले में कटे हुए राक्षसों के सिर की माला धारण कर रखी है। आपके चारो ओर शेषनाग का आवरण है। आपने हिरन की खाल को वस्त्र रूप में धारण कर रखा है।

काशी में विराजे विश्वनाथ,
नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत,
महिमा अति भारी ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

भगवान महादेव अपनी नगरी काशी में विश्वनाथ रूप में विराजते हैं जिनकी सवारी नंदी है और जो ब्रह्मचारी भी है अर्थात मोह-माया को त्यागने वाले। जो भी भक्तगण उन्हें प्रतिदिन सुबह उठकर भोग लगाता है, उस पर भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव कारा…॥

जय शिव ओंकारा आरती की रचियता (Jai Shiv Omkara Aarti Author Name)

Om Jai Shiv Omkara Aarti Lyricist Name: शिव आरती ॐ शिव ओमकारा को स्वामी शिवानंद जी ने लिखा है। यह स्वामी शिवानंद द्वारा उन्नीसवीं शताब्दी की शुरुआत में लिखा गया एक भजन है, जो वाराणसी में कहीं रहते थे। यह भजन वाराणसी के मंदिरों में लोकप्रिय हुआ और स्वामी विवेकानंद को अपनी वाराणसी यात्रा के दौरान सुनने को मिला। गीतों से प्रेरित होकर, स्वामी विवेकानंद इस भजन को बंगाल के बेलूर मठ में ले आए। उन दिनों बेलूर मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय था।

दोस्तों आपने शिव जी की आरती(Shiv Ji Ki Aarti Lyrics in hindi) जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में पढ़ा ओर इसके हिंदी अर्थ को समझा। अगर आपको इसके अर्थ के सम्बन्ध में कोई राय देना हो तो आप हमें ईमेल ओर सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क कर सकते है ओर अपना सुझाव दे सकते है। आप हमारे Contact Us पेज पर सोशल मीडिया से जुड़ सकते है।

Shiv ji ki Aarti Lyrics video Link

जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में आप यूट्यूब पर भी सुन सकते है जिसमे इसके लिरिक्स भी दिए गए है और इसमें पूरी आरती समाहित है।आरती सुनने लिए निचे लिंक पर क्लिक कीजिये

Shiv ji ki Aarti FAQ:

Shiv Aarti Om Jai Shiv Omkara को किसने लिखा ?

Shiv ji ki Aarti Lyrics “ॐ शिव ओमकारा” को स्वामी शिवानंद जी (Swami Shivananda) ने लिखा है।

शिव जी की आरती किस कथा के बाद की जाती है ?

शिव जी आरती(Shiv aarti) शिव पुराण कथा ,सोमवार व्रत ,16 सोमवार व्रत ,श्रावण सोमवार व्रत ओर प्रदोष व्रत कथा के बाद की जाती है।

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