श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति 2023

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श्री शिवाय नमस्तुभ्यं: महादेव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न मंत्र प्रयोग में लाये जाते है। ॐ नमः शिवाय को तो हम बचपन से सुनते आये है इसके अलावा शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र भी हम शिव मंदिरो में सुनते आये है। आज हम जिस मंत्र की बात कर रहे है वो आपने 2019 के बाद ही सुना हो।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति

जब कोरोना का काल चल रहा था तब की कथा ऑनलाइन प्रसारित होती थी और इस कथा में विभिन्न उपाय भी बताये जाते थे। उस समय लोगो की तबियत में भी उतार चढ़ाव रहता था। तब उन्होंने श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र को बताया था। इस मंत्र का जप करने और प्रयोग में लाने से लोगो को फायदा हुआ और इस मंत्र की महिमा और भी बड़ गयी।श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति (Shree Shivay Namastubhyam Mantra) का उल्लेख शिव महापुराण में दिया गया है।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं भगवान शिव का मंत्र है और यह मंत्र कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी की शिव पुराण कथा से सुनने में आया। पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने इस मंत्र को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया है और इसे शिव मंत्रो में बहुत फायदा देने वाला मंत्र बताया है। तब से यह Shiv Mantra काफी चर्चा में रहा है।

pandit pradeep mishra Shree Shivay Namastubhyam Mantra
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी की शिव पुराण कथा

इस मंत्र का प्रयोग व्यापक स्तर पर किया जाने लगा। पहले ॐ नमः शिवाय मंत्र जो शिव का पंचाक्षरी मंत्र है को सामान्य बोलचाल और जप में प्रयोग किया जाता था और किया जाता है वैसे ही इस मंत्र का जप अब प्रयोग में होने लगा है। इस मंत्र को यात्री बस पर लगाया गया ,मंदिरो में लगाया गया और नए घर के निर्माण में भी प्रवेश द्वार पर यह मंत्र लगाया गया। वर्तमान में पंडित प्रदीप मिश्रा जी की शिव पुराण कथा में श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति होते देखा यानि इसके बारे में हमेशा सुनने को मिलता है।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का हिंदी अर्थ (Shree Shivay Namastubhyam Mantra Meaning Hindi)

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का हिंदी अर्थ है “हे शिव मैं आपको नमस्कार करता हूँ”। शिवाय का अर्थ देवो के देव महादेव शिव है तथा नमस्तुभ्यं का अर्थ नमस्कार या प्रणाम से है।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति, श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की महिमा
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श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का जाप

इस जाप करने ले लिए आपको ऊन या कुशा के बने आसन को उपयोग में लाना होगा ,कुशा का आसन सस्ता और आसानी से मिल जाता है उसे खरीद सकते है और यह आसान आपका व्यक्तिगत आसान होगा। इस मंत्र के जाप का एक समय निश्चित कर लेना चाहिए और हर रोज़ उसी समय पर इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

108 रुद्राक्ष की माला के साथ इस मंत्र का 108 बार जाप करने से लाभ प्राप्त होता है। रुद्राक्ष की माला में कुल 109 दाने होने चाहिए यानि एक सुमेरु और 108 दाने।

आप इस मंत्र का जाप मंदिर में या घर में बने मंदिर के सामने बैठ कर कर सकते है। अगर आप हॉस्टल में या कही रूम से रह रहे है तो शिव जी की फोटो के सामने भी कर सकते है। अगर आपने ईशा रुद्राक्ष दीक्षा से रुद्राक्ष किट प्राप्त किया है तो उसमे आदियोगी की तस्वीर आपको मिल जाएगी। इस तस्वीर को छात्र अपनी टेबल के सामने लगा दे और फिर मंत्र का जप कर सकते है।

सबसे पहले अपने मस्तक पर भस्म(विभूति ) लगा ले और फिर ॐ श्री शिवाय नमस्तुभ्यं इस मंत्र का जप कीजिये 109 बार। आप यूट्यूब पर से इस मंत्र को सुनते हुए भी जप कर सकते है।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की महिमा (Shree Shivay Namastubhyam Mantra Benefits in Hindi)

जिस प्रकार महामृत्युंजय मंत्र मृत्यु पर विजय दिलाता है वैसे ही इस श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की महिमा है।

इस मंत्र का जाप करने से कई लोगो को सफलता मिली है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुई है। श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की महिमा यह भी है की इस मंत्र के जाप से कई बीमारियों में भी आराम मिलता है। पंडित प्रदीप मिश्रा जी कहते हैं कि भयंकर से भयंकर बीमारी हो इस मंत्र के जाप से हार्टअटैक, कैंसर जैसी भयानक बीमारियों का उपचार भी संभव है। जप डॉक्टर का इलाज कारगर सिद्ध नहीं होता ऐसे समय में इस मंत्र का प्रयोग सफल होते देखा गया है।

इस मंत्र का जाप करके सरसो का तेल के साथ काली मिर्ची, लोंग, कमलगट्टे, बेलपत्र और शमी पत्र शिव जी पर अर्पित करके उस तेल को किसी पात्र में एकत्रित कर लीजिये। अब इस अभिमंत्रित तेल का उपयोग किसी भी लकवेग्रस्त व्यक्ति के शरीर के हिस्से पर प्रयोग करने पर आराम होते देखा गया है।

इस मंत्र से नित्य शिवलिंग पर जल अर्पित करके और जलधारी से उस जल को पात्र में भरकर वापिस ले आये फिर उस जल को रोगी को नित्य पिलाने से उसे बीमारी में आराम मिलता है। मुख के कैंसर में भी यह आराम देखा गया है।

अगर आपके घर के आस पास शिवलिंग न हो तो आप रुद्राक्ष को भी पानी में रात में रखकर सुबह इस मंत्र का जप करके रोगी को पीला सकते है।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की महिमा इतनी है की अगर आपके पास रुद्राक्ष भी न हो तो जल के पात्र को हाथ में ले कर इस मंत्र का उच्चारण कर आप रोगी को पीला सकते है।

व्यापार सफलता के लिए इस मंत्र को अपनी दुकान और स्टोर पर लगा दे।

इस मंत्र को आप अपने कार्यस्थल पर भी लगा सकते है या कंप्यूटर में वॉलपेपर के रूप में भी उपयोग कर सकते है।

प्रतियोगिता परीक्षा और स्कूल के छात्रों को इस मंत्र का जप करके शिवलिंग पर नित्य जल अर्पित करना चाहिए इससे आपका मन शांत बना रहेगा और आपमें एकाग्रता निर्मित होगी।

विवाह के इच्छुक युवक- युवती इस मंत्र का जप करते हुए हल्दी या केसर मिला हुआ जल शिवलिंग पर अर्पित करे जिससे आपके जीवन में विवाह के योग जल्द ही निर्मित होंगे।

इस मंत्र का जाप करने से सुख, समृद्धि, धन लाभ, शांति की प्रप्ति भी होती है।श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की महिमा और भी है जो आप को इसके प्रयोग से ही पता चलेगा .

इस पोस्ट में आपने Shree Shivay Namastubhyam मंत्र के अर्थ को और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति को हिंदी में जाना और साथ ही इसके जप की विधि और इस मंत्र से होने वाले लाभ के बारे में जाना। अगर आप इस पोस्ट से सम्बंधित कोई विचार रखना चाहते है तो आप हमें कमेंट या सोशल मीडिया पर फॉलो करके अपना सन्देश भेज सकते है।

FAQ:

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं किसका मंत्र है ?

यह मंत्र भगवान शिव का मंत्र है।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का अर्थ क्या होता है?

इसका अर्थ :हे शिव मैं आपको नमस्कार करता हूँ।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति कहा से हुई है ?

यह मंत्र शिव महापुराण से लिया गया है।

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