कुंभ राशि के इष्ट देव कौन है (kumbh rashi ke isht dev kaun hai)

kumbh rashi ke isht dev kaun hai: कुंभ राशि राशियों में 11 स्थान की राशि है। काल पुरुष की कुंडली में इसका स्थान 11 भाव है। कुंभ राशि का प्रतीक एक घड़े के सामान जिसमे से पानी बह रहा है। कुंभ राशि के जातको को भी जीवन में बहने के लिए जीवन में स्किल अर्जित करना आवश्यक है। इनके पास प्रचुर मात्रा में ज्ञान है यह ज्ञान दुसरो को बाट सकते है। यह ज्ञान और दया से भरपूर होते है ।

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कुंभ राशि क्या है (Aquarius Rashi in Hindi)

काल पुरुष की कुंडली में 11th हाउस कुंभ राशि को दर्शाता है। कुंभ राशि क्या है इसे ऐसे समझे की जिस जातक का जन्म कुंभ राशि में हुआ है यानि उसकी कुंडली में कुंभ राशि लिखी है इसका अर्थ है की उसके जन्म के समय चन्द्रमा कुंभ राशि में स्थित है। जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में स्थित है वही राशि जन्म राशि कहलाती है। कुंभ राशि के इष्ट देव कौन है यह आगे हम इसी पोस्ट में जानेंगे ।

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कुंभ राशि के बारे में संपूर्ण जानकारी (Kumbh Rashi Facts)

कुंभ राशि के जातक का स्वाभाव (kumbh rashi personality)

यह बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते है। किसी भी चीज को अच्छे से जानना चाहते है। अपने विचारो को संचार करना चाहते है। लोगो के लिए कुछ करने का मन बनाते है।इस राशि के लोग मानवतावादी होते है जान साधारण की भलाई के लिए कार्य करना चाहते है।

यह लोगो को अपने समकक्ष बनाना चाहते है।यह जिस क्षेत्र में होते है उसमे नए बदलाव और क्रांति लाना चाहते है। यह अपने कानून खुद बनाते है और जिंदगी में अपने हिसाब से चलना चाहते है। इसका तत्व वायु तत्व है और यह एक स्थिर राशि है । यह नया आयाम प्रदान करने की राशि है। इस राशि के लोग किसी सीमा में बनकर नहीं रहना चाहते। इनमे अधिक कार्य करने की क्षमता होती है।यह प्रचुरता की राशि है। दानी राशि है। इसका राशि स्वामी शनि है । जिस प्रकार मकर में शनि ग्रहणशील होता है वैसे कुम्भ में शनि प्रदान करने वाला दानी हो जाता है ।

कुंभ राशि के जातक प्रायः चंचल स्वाभाव के होते है इनमे अक्सर अस्थिरता देखि गयी है तथा यह कल्पनावादी होते है। इनके स्वाभाव में किसी का अहित न करना तथा शर्मीले स्वाभाव का होना शामिल है। यह कम बोलने वाले, शांत और गंभीर ,मृदुलभाषी होते है। इनकी दिनचर्या काफी इस राशि के लोग मानवीय दृष्टिकोण और प्रगतिशील जीवन और उसकी समस्याओं के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण रखते हैं।

यह संकोची होते हे।, निर्णय लेने से पूर्व पूर्ण नापतौल करते हैं या अन्य लोगों द्वारा कार्यारम्भ करने तक प्रतीक्षा करते हैं। सदा सकतर्कता, धैर्य, एकाग्रता, अध्ययनशीलता से युक्त रहते हैं। वार्तालाप रूचिकर होता है। स्पष्टवादी, सबके प्रिय होते हैं। दयालु, अध्ययन प्रेमी और सज्जन होते हैं। अतीन्द्रिय शक्ति से युक्त होते हैं, ध्यान-साधना में रूचि होती है। स्मरणशक्ति तीव्र, दृष्टिकोण वैज्ञानिक होता है।

गरीबों के सेवक होते हैं। नवीन तकनीक और मशीनरी, अनुसंधान, निवेश आदि द्वारा धनार्जन करते हैं। तकनीकी शिक्षा में रूचि होती है। परिवार से लगाव होता है। जीवनसाथी के चुनाव में आयु को अनदेखी कर बृद्धि और शिक्षा में समानता पर जोर देते हैं। गृह सुसज्जित होता है जिसमें आधुनिक ढंग से पुरातात्विक सामग्री एकत्रित रहती है। अपने प्रेम को अभिव्यक्त नहीं करते। अगर इनका प्रेमी वासनाप्रिय हो तो वह असंतुष्ट होता है। क्योंकि कुंभ राशि के व्यक्ति शीतल होते हैं। कुंभ राशि के इष्ट देव कौन है अगर यह जान ले तो इनके जीवन में परेशानियों से मुक्ति की जा सकती है ।

कुंभ राशि के जातक की शारीरिक संरचना (kumbh rashi body structure)

इनमे मध्यम कद, हृष्ट-पुष्ट चेहरा सुंदर और गोल, गाल भरे हुए कनपटियां और जांघे विकसित होती हैं। गोरा रंग, भूरे बाल, असुंदर दांत, पिंडलियों में मस्सा, बाल काले घने ,गाल पर डिंपल और पैर मोटे, नसें विकसित होती हैं।

कुंभ राशि का चिन्ह (kumbh rashi symbol)

कुंभ राशि का चिन्ह घड़ा होता है।लेकिन जयपुर जंतर-मंतर में बनी राशियों की वैदिक तस्वीरों में कुम्भ राशि का स्वरुप को पुरुष के सर पर घड़ा और घड़े में दरार है तथा उस घड़े से बहता पानी उस पुरुष को भीगा रहा है इस प्रकार दर्शाया गया है। यह वेदो के हिसाब से एक सही चित्रकारी है।जिसे कही -कही कलश के सामान भी माना गया है।

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जंतर मंतर जयपुर स्थित कुम्भ राशि का प्रतीक
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जंहा पुरुष को दोनों हाथो में घड़े लिए दर्शाया है वंही कन्या राशि में कन्या को हाथो में अन्न और दीपक लिए दर्शाया है।

कुंभ राशि का व्यवसाय (kumbh rashi professions)

कुंभ राशि वाले अक्सर नवीन तकनीक और मशीनरी, अनुसंधान, निवेश आदि द्वारा धनार्जन करते हैं। तकनीकी शिक्षा में रूचि होती है।
कुंभ राशि का व्यवसाय लोहा संबन्धित कार्य , मशीनरी के कार्य , केमिकल प्रोडक्ट , ज्वलनशील तेल ( पैट्रोल, डीजल आदि ) ,अनुसंधान कार्य , ज्योतिष कार्य , लोहे से संबंधित कच्ची धातु , कोयला , चमड़े का काम , जूते , अधिक श्रम वाला कार्य , नौकरी , मजदूरी , ठेकेदारी , दस्तकारी , मरम्मत के कार्य , लकड़ी का कार्य , मोटा अनाज , प्लास्टिक एवम रबर उद्योग , काले पदार्थ , स्पेयर पार्ट्स , भवन निर्माण सामग्री , पत्थर एवम चिप्स , ईट , शीशा ,टाइल्स , श्रम एवम समाज कल्याण विभाग , टायर उद्योग , कबाड़ी का काम, तेल निकालना , पी डब्लू डी , सड़क निर्माण , सीमेंट आदि रोजगार के लिए देखे जाते है।

कुंभ राशि का स्‍वामी (kumbh rashi lord)

कुंभ राशि के स्वामी शनि देव होते है। कालपुरुष की कुंडली में यह 11 वे भाव के राशि होती है जो लाभ भाव के नाम से भी जाना जाता है।

कुंभ राशि तत्व (kumbh rashi element)

कुंभ राशि एक वायु तत्व राशि है और यह स्थिर राशि है।

कुंभ राशि के इष्ट देव कौन है (kumbh rashi ke isht dev kaun hai)

kumbh rashi ke isht dev kaun hai: वैसे तो शनि देवता इस राशि के स्वामी होते है लेकिन अगर कुंभ राशि के इष्ट देव कौन है की बात की जाये तो शिव जी कुंभ राशि के इष्ट देवता होते है। पटेश्वर शिव मंदिर जो महाराष्ट्र में स्थित है यंहा कुम्बेश्वर पिंडी नाम से शिवलिंग है । इस शिवलिंग की खासियत यह है की इसमें दो कुम्भ (घड़े) स्थित है । इस तरह का शिवलिंग शायद दुनिया में एकमात्र है और यह प्राचीन है ।

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Kumbeshwar Pindi (Image by kevin standage Blog)
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कुंभ राशि के इष्ट देव शिव जी

कुंभ राशि का रंग (kumbh rashi color)

कुंभ राशि का रंग काला और नीला और हरे-नीले से से युक्त होता है।

कुंभ राशि के संभावित रोग (kumbh rashi Disease)

संक्रामक रोग, दंत व्याधि, टान्सिल आदि देखे गए है।

कुंभ राशि में उच्च ,नीच और मूल ग्रह

कुंभ शनि की मूल राशि है। कुम्भ में कोई गृह उच्च नीच का नहीं होता है।

कुंभ राशि के लिए मंत्र (kumbh rashi mantra)

| |ॐ श्रीं उपेन्द्राय अच्युताय नमः ||

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कुंभ राशि मंत्र

इस मंत्र का प्रति दिन 1 माला जाप करना चाहिए। इसके अलावा शिव जी का मंत्र ॐ नमः शिवाय का भी जाप किया जा सकता है।

कुंभ राशि के लिए धातु (kumbh rashi metal)

कुंभ राशि के लिए लोहा मूल धातु मानि गयी है।

कुंभ राशि के लिए रत्न (kumbh rashi gemstone)

कुंभ राशि के लिए नीलम मूल रत्न मन गया है। लेकिन यह कुंडली में लग्न और कारक ग्रहो और सम्पूर्ण कुंडली को जानकर ही पहनने के योग्य होता है।

कुंभ राशि के लिए रुद्राक्ष (kumbh rashi rudraksha)

कुंभ राशि के लिए सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के बारे में बताया गया है।

कुम्भ राशि नाम अक्षर (kumbh rashi name letters)

कुम्भ राशि के नाम गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा से शुरू होते है।

आज आपने इस लेख में जाना की कुंभ राशि के इष्ट देव कौन है (kumbh Rashi ke Isht Dev Kaun Hai) उसके बारे में चर्चा की। कुंभ राशि क्या है तथा कुंभ राशि के बारे में आवश्यक जानकारी आपको कैसी लगी। आशा है कि यह आपको अपने दैनिक जीवन में सहायता प्रदान करेगा।

FAQ:

क्या कुंभ राशि (Aquarius) के जातक नीलम धारण कर सकते है ?

नहीं ,इसके लिए पूरी कुंडली का अध्ययन जरूरी होता है। उसके बाद ही इस पर विचार किया जाता है।

क्या कुंभ राशि (Aquarius) के जातक 7 मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है ?

हाँ ,रुद्राक्ष का किसी प्रकार का नुक्सान नहीं होता परन्तु आपका जीवन सात्विक होना चाहिए।

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