Shankhpal Kaal Sarp Dosh in Hindi: 12 काल सर्प दोषो में शंखपाल काल सर्प दोष चतुर्थ स्थान पर आता है। राहु कुंडली में चतुर्थ स्थान पर और केतु दशम भाव में हो तब यह दोष बनता है। इस कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को आंर्थिक तंगी, मानसिक तनाव, अपनी मां, ज़मीन, परिजनों के मामले में कष्ट भोगना होता है। शंकपाल सर्प का उल्लेख बौद्ध जातक कथाओ में किया गया है।

शंखपाल कालसर्प दोष कब बनता है
कुंडली के चौथे भाव में राहु और दसवें भाव में केतु के विराजमान होने पर व्यक्ति की कुंडली में शंखफल कालसर्प दोष बनता है और सारे ग्रह इन दोनों के मध्य विराजमान होने चाहिए। कभी कभी कोई शुभ ग्रह जैसे गुरु या चंद्र जब इस ग्रहो से बाहर होता है और 6-8-12 में होता है तो कुछ ज्योतिषी इन्हे भी इस दोष (Shankhpal Kaal Sarp Dosh) में गिनते है।

चतुर्थ भाव में राहु विराजमान होने पर माता ,जमीन जायदात ,वाहन सुख जैसे कारको को प्रभावित करता है। कालपुरुष की कुंडली में चतुर्थ स्थान चन्द्रमा का होता है। यंहा राहु होने से यह मन को प्रभावित करता है। राहु की सप्तम सृष्टि दशम स्थान पर होती है जंहा केतु भी विराजमान है। यंहा यह कार्य क्षेत्र और रोजगार को प्रभावित करता है। इसके बाद राहु की पंचम दृष्टि अष्टम स्थान पर होती है यंहा यह आयु और इस भाव के कारकत्वों को प्रभावित करता है। राहु की नवम दृष्टि 12 वे घर पर होती है जो खर्च ,शारीरिक कष्ट ,विवाह की हानि आदि कारकत्वों को प्रभावित करता है।
केतु की पंचम दृष्टि धन स्थान पर होने पर यह धन के सम्बन्ध में उतर चढ़ाव देता है। केतु की नवम दृष्टि 6 वे स्थान पर होने पर यह ऋण और शत्रु पक्ष के कारकत्वों को प्रभावित करती है।
शंखपाल कालसर्प दोष के लक्षण (Shankhpal Kaal Sarp Dosh Effects)
- कुंडली में इस दोष (Shankhpal Kaal Sarp Dosh) का बनना जातक के जीवन में आने वाली आर्थिक तंगी, बीमारी और अव्यवस्था का संकेत है। इसलिए उसे इसकी तैयारी करनी चाहिए।
- यदि एक युवा है, तो जातक को सही चुनाव करने में मुश्किल होगी, जिसके कारण उसे जीवन में जल्दी बसना मुश्किल हो सकता है।विद्या प्राप्ति में भी उसे आंशिक रूप से तकलीफ उठानी पड़ती है।
- इस दोष के जातकों को जमीन-जायदाद से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस तरह का कोई भी सौदा उचित जांच-परख कर ही करना चाहिए। इससे घर-द्वार, जमीन-जायदाद व चल- अचल संपत्तिा संबंधी थोड़ी बहुत कठिनाइयां आती हैं और उससे जातक को कभी-कभी बेवजह चिंता घेर लेती है
- जातक को माता से कोई न कोई किसी न किसी समय आंशिक रूप में तकलीफ मिलती है।
- सवारी एवं नौकरों की वजह से भी कोई न कोई कष्ट होता ही रहता है। इसमें उन्हें कुछ नुकसान भी उठाना पड़ता है।
- जातक का वैवाहिक जीवन सामान्य होते हुए भी वह कभी-कभी तनावग्रस्त हो जाता है।
- चंद्रमा के पीड़ित होने के कारण जातक समय-समय पर मानसिक संतुलन खोया रहता है।
- कार्य के क्षेत्रा में भी अनेक विघ्न आते हैं। पर वे सब विघ्न कालान्तर में स्वत: नष्ट हो जाते हैं।
- बहुत सारे कामों को एक साथ करने के कारण जातक का कोई भी काम प्राय: पूरा नहीं हो पाता है।
शंखपाल कालसर्प दोष कितने वर्ष तक रहता है (Shankhpal Kaal Sarp Dosh Time Period)
ऐसा माना जाता है की शंखपाल कालसर्प दोष व्यक्ति के जीवन को जन्म से 42 वर्ष तक प्रभावित करता है। इस दोष का प्रभाव कितना होगा यह इस बात पर निर्भर करता है की अन्य ग्रह जैसे मंगल ,गुरु ,शुक्र कितने पीड़ित है अगर पीड़ित है तो विवाह में समस्या होगी तथा चन्द्रमा पीड़ित है तो मानसिक समस्या जैसे अवसाद की स्थिति भी बन सकती है।
इसके बाद इस दोष (Shankhpal Kaal Sarp Dosh) का प्रभाव कम होने लग जाता है। लेकिन 42 वर्ष की उम्र तक व्यक्ति का कार्य ,रोजगार आदि प्रभावित हो जाता है। विवाह वैवाहिक जीवन में समस्या तथा संतान सम्बंधित समस्या,माता का स्वास्थ्य आदि को देखा जाता है।
शंखपाल कालसर्प दोष सकारात्मक पहलु (Shankhpal Kaal Sarp Dosh Positive Effects)
इस दोष के प्रभाव से जातक का आर्थिक संतुलन बिगड़ जाता है, जिस कारण आर्थिक संकट भी उपस्थित हो जाता है। लेकिन इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी जातक को व्यवसाय, नौकरी तथा राजनीति के क्षेत्रा में बहुत सफलताएं प्राप्त होती हैं एवं उसे सामाजिक पद प्रतिष्ठा भी मिलती है।
शंखपाल कालसर्प दोष के उपाय (Shankhpal Kaal Sarp Dosh Remedies)
- शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर चांदी का स्वास्तिक एवं दोनों ओर धातु से निर्मित नाग चिपका दें।
- शुभ मुहूर्त में सूखे नारियल के फल को जल में तीन बार प्रवाहित करें।
- 86 शनिवार का व्रत करें और राहु, केतु व शनि के साथ हनुमान की आराधना करें।
- हनुमान जी को मंगलवार को चौला चढ़ायें और शनिवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें।
- किसी शुभ मुहूर्त में एकाक्षी नारियल अपने ऊपर से सात बार उतारकर सात बुधवार को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें।
- सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं।
- शुभ मुहूर्त में सर्वतोभद्र मण्डल यंत्र को पूजित कर धारण करें।
- नित्य प्रति हनुमान चालीसा पढ़ें और भोजनालय में बैठकर भोजन करें। हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें और पांच मंगलवार का व्रत करते हुए हनुमान जी को चमेली के तेल में घुला सिंदूर व बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
- काल सर्प दोष निवारण यंत्र घर में स्थापित कर उसका प्रतिदिन पूजन करें।
- शनिवार को कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना मुंह देख एक सिक्का अपने सिर पर तीन बार घुमाते हुए तेल में डाल दें और उस कटोरी को किसी गरीब आदमी को दान दे दें अथवा पीपल की जड़ में चढ़ा दें।
- प्रत्येक शनिवार को चींटियों को शक्कर मिश्रित सत्तू या आटा उनके बिलों पर डालें।
- शंखपाल कालसर्प दोष के निवारण के लिए श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी भी दिन 400 ग्राम साबुत बादाम बहते पानी में प्रवाहित करें।
- गेहूं को पीले कपड़े में बांध कर जरुरतमंद व्यक्ति को दान दें।
- शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें।
- नागपंचमी के दिन 2 मुखी रुद्राक्ष, 8 मुखी रुद्राक्ष , 9 मुखी रुद्राक्ष सफ़ेद धागे में धारण करें। अगर नागपंचमी वाले दिन धारण न कर पाएं तो शुक्ल पक्ष के सोमवार को जब पंचमी तिथि हो तब धारण करें।
- अपने गले में सोमवार, मंगलवार और शनिवार के दिन लाल धागे में 8 मुखी रुद्राक्ष के 2 दान रुद्राक्ष, 9 मुखी रुद्राक्ष के 2 दाने और 4 मुखी रुद्राक्ष का 1 दाना और गौरीशंकर रुद्राक्ष 1 दाना धारण करें। जीवन में संपूर्ण सफलताएं प्राप्त होंगी।
- चांदी की अंगूठी धारण करना लाभप्रद रहेगा।
- किसी भी मंगलवार को घर की दक्षिण दिशा की ओर दीवार पर हनुमान बाहुक को लाल कपड़े में लटका दें।
- घर के प्रवेश द्वार पर मोर पंख लगाएं।
- मकान की छत पर कोयला रखने से बचें।
- शंखपाल काल सर्प दोष की पूजा करवाए।
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